तलव चाटो गोरों के..
September 28th, 2008 by Administrator | Filed under विवाद... और अपनों के साथ करो भेदभाव। ये है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड उर्फ बीसीसीआई का रवैया।
इसलिए दौरे पर आई ऑस्ट्रेलिया की टीम को जयपुर में अभ्यास के लिए दस पिचें खास बना कर दी जाती हैं। लेकिन खुद अपने खिलाड़ियों को सुविधाएं देने का सवाल आता है तो यह हाल है कि वडोदरा में ईरानी ट्रॉफी खेलने गई दो टीमों में से एक, शेष भारत की टीम को पांच सितारा होटल में रुकवाया जाता है लेकिन दिल्ली की टीम को तीन सितारा होटल में! यानी दिल्ली की टीम की औकात नहीं है शेष भारत के साथ एक ही जगह रुकने की।
पता नहीं यही भेदभाव था या मुनाफ पटेल से हुआ झगड़ा, कि दिल्ली टीम के कप्तान विरेन्दर सेहवाग मैच खतम होने से पहले ही वडोदरा छोड़ कर दिल्ली वापस लौट गए।
मुनाफ का किस्सा यह है कि जब दिल्ली की टीम बल्लेबाजी कर रही थी तो उन्होंने तैश में आकर सेहवाग को गालियां देनी शुरू कर दीं। इसके पहले मैच के दौरान मुनाफ ने ईशांत शर्मा से भी गाली-गलौज की थी। बात इतनी बढ़ गई कि बाकी खिलाड़ियों को बीच-बचाव करना पड़ा। दिन का खेल खत्म होने के बाद सेहवाग ने मुनाफ पटेल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई कि मुनाफ ने उन्हें गालियां दीं।
इसी के बाद सेहवाग दिल्ली लौट गए।
सब पैसे की माया है। क्रिकेट की परवाह नए खिलाड़ियों को कैसे हो सकती है जब चारों ओर से पैसे की बारिश हो रही हो। आईपीएल खेल लो तो सात पुश्तों के घी खाने का इंतजाम हो जाता है, फिर भला “भद्रजन” बन कर खेलने की परवाह कोई क्यों करे।
भारतीय टेस्ट टीम की टोपी पहनना कभी हर भारतीय क्रिकेटर की जिंदगी का लक्ष्य होता था, अब तो दूसरे के सिर से ये टॉपी कैसे उतरवाई जाए, इसकी तिकड़में की जाती हैं और गर्व से इसका प्रेस में बखान किया जाता है।
फिर सिर्फ मुनाफ को दोषी क्यों माना जाए…
Tags: ईरानी ट्रॉफी, बीसीसीआई, मुनाफ पटेल, विरेन्दर सेहवाग







