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Archive for the ‘चर्चित चेहरे’ Category

लक्ष्मीपति बालाजी की वापसी

February 3rd, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

उस शोएब अख्तर सदमे में बैठे रहे। खाना खाने गए साथियों के साथ तो भी उनके मुंह से बोल नहीं फूट रहा था। खेल के मैदान पर इतनी बड़ी बेइज्जती उनकी पहले कभी नहीं हुई थी.. एक नौसिखिया, दसवें नम्बर पर खेलने आए बल्लेबाज ने उनकी गेंद पर छक्का मार दिया? ये कैसे हुआ.. महान शोएब अख्तर की गेंद पर छक्का मार दिया!

बात है 2004 की, जब सौरव गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में एकदिवसीय श्रृंखला खेल रही थी। टीम के पाकिस्तान रवाना होने के पूर्व भारत के दो नए और युवा तेज गेंदबाज चर्चा का विषय बने हुए थे। इरफान पठान और लकक्ष्मीपति बालाजी। तब पाकिस्तानी टीम के कोच जावेद मियांदाद ने अपना मशहूर बयान दिया था- “ऎसे इरफान पठान तो हमारे यहां गली- गली में होते हैं।“ और उसके बाद पठान ने पाकिस्तानी बल्लेबाजों की ऎसी हवा बिगाड़ी थी कि मियांदाद मुंह छिपाए घूमते थे। भारत ने वह श्रृंखला 3-2 से जीती थी।

उसी श्रृंखला में लाहौर में खेले गए आखिरी एकदिवसीय मैच में बालाजी ने शोएब अख्तर की गेंद को उठा कर मारा और छक्के के लिए सीमारेखा से बाहर भेज दिया था। तब तक शोएब अख्तर की गेंदों का ऎसा हौव्वा बना हुआ था जैसे कि भारत के बड़े बल्लेबाज भी उन्हें खेलना मुश्किल पाते थे। उसे शोएब की तेज गेंद पर, आखिरी बल्लेबाज के रूप में खेलने आए बालाजी जब छक्का मारा तो पूरा स्टेडियम स्तब्ध रह गया था। शोएब तो अगले दिन तक सदमे में थे।

बालाजी के उस “महान शॉट” पर तमिल में एक गीत भी रचा गया :

देखिए बालाजी के उस जबरदस्त छक्के का वीडियो यहां:

दिलचस्प बात यह है कि अपने हमेशा बिखरती शर्मीली मुस्कान और लंबे बालों के कारण बालाजी उस श्रृंखला में पाकिस्तानी लड़कियों के बीच बड़ॆ लोकप्रिय हो गए थे।

लेकिन उसके बाद चोट लगने के कारण 2005 में बालाजी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हो गए।

अब, श्रीलंका में खेली जा रही एकदिवसीय श्रृंखला में उन्हें घायल मुनाफ पटेल की जगह फिर टीम में स्थान मिला है। संयोग की बात है कि 2005 में श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए ही चोट लगने के कारण बालाजी टीम से बाहर हुए थे।

देखें, आज कोलम्बो में श्रीलंका के खिलाफ होने वाले तीसरे एकदिवसीय मैच में बालाजी खेलने उतरते हैं क्या।

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पोंटिंग ऑस्ट्रेलियाई टीम से निकाले गए!

February 2nd, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कप्तान और विश्व क्रिकेट में बल्लेबाजी का शिखर फतह करने के प्रबल दावेदार रिकी पोंटिंग को एकदिवसीय टीम से निकाल दिया गया है। आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि पोंटिंग को अगएल दो मैचों के लिए “विश्राम” दिया गया है।

उनकी जगह माइकेल क्लार्क को श्रृंखला के बाकी चार मैचों के लिए कप्तान बना दिया गया है। यानी अघोषित तौर पर पोंटिंग पूरी श्रृंखला के लिए बाहर कर दिए गए हैं।
पोंटिंग के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया की टीम लगातार पिट रही है और कल रविवार को पर्थ में न्यूजीलैण्ड की टीम से दो विकेट से हार के बाद पोंटिंग को टीम से अगले दो मैचों के लिए टीम से बाहर कर दिया गया। पोंटिग ने इस मैच में सिर्फ पांच रन बनाए थे और कभी अजेय मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने यह लगातार चौथा मैच हार था।

न्यूजीलैण्ड से पहले दक्षिण अफ्रीका के साथ घरेलू एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला हुई थी जिसमें ऑस्ट्रेलियाई टीम आखिरी तीन मैच लगातार हारी थी। उसके बाद अब न्यूजीलैण्ड के हाथों पहला ही मैच घरेलू मैदान पर हारना पोंटिंग के टीम से बाहर होने का सबब बन गया।
पर्थ में न्यूजीलैण्ड के हाथों कैसे पिटी ऑस्ट्रेलियाई टीम, पढ़िए यहां:

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सचिन- सौरव: पुरानी शराब, बेहतरीन नशा!!

October 18th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

मोहाली टेस्ट के पहले और दूसरे दिन जो स्टेडियम में खेल देखने के लिए मौजूद थे, वे क्रिकेट की दुनिया में सबसे भाग्यशाली लोगों में से थे। भारतीय क्रिकेट के दो अभूतपूर्व बल्लेबाज, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली अपनी जिंदगी भर की प्रतिष्ठा बचाने के लिए मैदान पर उतरे थे। और न सिर्फ दोनों ने अपनी प्रतिष्ठा बचाई, बल्कि उसमें चार चांद और लगा दिए।

बात सिर्फ रन या रेकॉर्ड बनाने की नहीं है। बात है उस दबाव, अपमान और तनाव की आग में तप कर सोने की तरह खरा उतरने की है जिसमें सचिन और सौरव पिछले करीब एक साल से जलाए जा रहे थे।

न सिर्फ बीसीसीआई और नए खिलाड़ियों द्वारा अपमानित किए गए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया जिस तरह सीनियर खिलाड़ियों के पीछे पड़ा हुआ था उसे झेल पाना किसी फौलादी जिगर वाले के लिए भी कम नहीं था।

यह अपमान इतना अधिक बढ़ गया था कि सौरव ने संन्यास लेने की घोषणा कर दी, कुम्बले ने अखबार के अपने कॉलम में लिखा कि मीडिया में अपनी आलोचना देख कर उन्हें लगता है जैसे वे ऑस्ट्रेलिया में आ गए हैं। यही नहीं, अक्सर चुप रह जाने वाले सचिन तेंदुलकर तक इस बार खामोश नहीं रह पाए और लारा का रेकॉर्ड तोड़ने के बाद पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने भी कहा कि “मुझसे यह बोलने का हक किसी को नहीं हैं कि अब तुम खेलना बंद कर दो।”

रेकॉर्ड पुस्तिकाओं में लिखा जाएगा कि सचिन ने इस मैच की पहली पारी में 88 रन बनाए, उस दौरान टेस्ट मैचों में सर्वाधिक रन बनाने का ब्रायन लारा का रेकॉर्ड तोड़ा, टेस्ट मैचों में 12,000 रनों की संख्या पार की- लेकिन उनमें सचिन की इस पारे के दौरान मारे गए शॉट्स की खूबसूरती दर्ज नहीं हो पाएगी, स्टेडियम में बैठे और टीवी पर सचिन की पारी का एक- एक रन गिनते, दिल थाम कर बैठे लाखों लोगों की खुशी का बयान नहीं लिखा जा सकेगा जो सचिन द्वारा लारा का रेकॉर्ड तोड़ने वाला रन बनाते ही ऎसे खुशी से उछल पड़े थे जैसे उनके ही किसी करीबी ने वह रेकॉर्ड बनाया हो।

रेकॉर्ड पुस्तिकाएं यह भी बताएंगी कि मैच के दूसरे दिन सौरव गांगुली ने भी अपना शतक पूरा किया, लेकिन उनमें यह कहां से लिखा जा सकेगा कि शतक पूरा करते ही गांगुली के चेहरे पर जो मुस्कान फैली थी वह बेशकीमती हीरों में भी नहीं तौली जा सकती, कि उनके 100 वां रन लेते ही टीवी के सामने बैठे दर्शक भी कैसे गांगुली के सम्मान में ताली बजा उठे थे।

और हां, उससे पहले जब गांगुली ने अपना अर्धशतक पूरा किया था तब हवा में उनका मुक्का लहराना और जवाब में ड्रेसिंग रूम से हरभजन का पहलवानों की तरह बांहों की मांसपेशियां फुला कर दिखाना भी तो इन रेकॉर्ड पुस्तिकाओं में दर्ज नहीं हो पाएगा।

वह तो दर्ज है उन लाखों दर्शकों के दिलों में जो सचिन और सौरव के अपमान से तिलमिलाए बैठे है और रास्ता देख रहे थे कि देश को गौरव की नयी ऊंचाइयां दिलाने वाले इन खिलाड़ियों का बल्ला कब बोलेगा।

मोहाली में दोनों का बल्ला बोला और क्या खूब बोला, कि बीसीसीआई से लेकर, वरिष्ठ खिलाड़ियों को “बूढ़ों की सेना” कहने वाले मीडिया के मुंह पर गोदरेज का ताला पड़ गया।

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गांगुली ने एक तीर से किए कई शिकार

October 8th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

तो सौरव गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के साथ वर्तमान श्रृंखला के बाद संन्यास लेने की घोषणा कर दी।

और इस एक तीर से गांगुली ने अपने कई “सिरदर्दों” का शिकार सफाई से कर लिया।

1.उनका सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ था “ईडियट बॉक्स” याने टीवी चैनलों के उतने ही जाहिल पत्रकार जो दिन रात सिर्फ इसी चर्चा में लगे हुए थे कि गांगुली को बोर्ड कैसे निकालने वाला है, कब निकालने वाला है, क्यों निकालने वाला है वगैरह।

गांगुली के टीम से निकाले जाने की घंटों चर्चा के अलावा इनके पास और कोई काम नहीं था। लेकिन जिस दिन से सौरव गांगुली ने रिटायरमेंट का ऎलान कर दिया, उस दिन से ये बुद्धू बक्से की फौज उन्हें छोड़ कर बाकी वरिष्ठ खिलाड़ियों के पीछे पड़ गई। सौरव का सिर्फ गुणगान दिखाया जाने लगा। यानी सौरव के सिर से 24 घंटे चलने वाली “ब्रेकिंग न्यूज” का सिरदर्द खत्म हो गया, तनाव खत्म।

2.क्रिकेट चयनकर्ताओं ने उन्हें सिर्फ पहले दो टेस्ट के लिए टीम में लिया था, वह भी 15 सदस्यीय दल में। यह तय भी नहीं था कि टेस्ट खेलने उतरने वाले अंतिम 11 खिलाड़ियों में सौरव को जगह मिलती।

क्रिकेट बोर्ड के आका जिस तरह सौरव को लगातार अपमानित करने पर तुले हुए थे, उसे देखते हुए आश्चर्य की बात नहीं होती अगर सौरव को टेस्ट में 12 वां खिलाड़ी ही बना दिया जाता।

इसीलिए संन्यास लेने की घोषणा करते समय सौरव ने बड़ी चतुराई से अपने शब्दों का चयन किया। उन्होंने कहा “ ये चार टेस्ट मेरे करियर के आखिरी टेस्ट होंगे।”

संन्यास लेने की घोषणा के बाद सौरव के पक्ष में जिस तरह देश- विदेश में सहानुभूति की लहर चल पड़ी है, उसे देखते हुए अब चयनकर्ताओं या बीसीसीआई के अन्य आकाओं की हिम्मत नहीं होगी कि सौरव को इन चार टेस्ट मैचों से बाहर रखें। सौरव अब चाहे रन बनाएं या न बनाएं, उन्हें इन चार मैचों में खिलाना क्रिकेट बोर्ड की मजबूरी बन गई है। यानी बोर्ड से दो की जगह चार मैच झपट लिए सौरव ने। “ दादा” के सिवा दिमागी शतरंज में बीसीसीआई को ऎसी मात भला और कौन खिलाड़ी दे सकता था?

3.इन सारे दिमागी तनावों से मुक्त होंगे, तो सौरव के सामने मौका है बढ़िया खेल दिखा पाने का। अगर सफल हो गए तो संन्यास छोड़ कर खेलना जारी रख सकते हैं। अगर नहीं हुए तो भी बोर्ड के हाथ बेइज्जती नहीं होगी और वे अपनी शान के साथ रिटायर हो सकेंगे।

4.ऑस्ट्रेलिया के सामने खेलना आसान नहीं होता, चाहे अपने देश में हो या उअंके। जिन “युवा” खिलाड़ियों के दम पर वरिष्ठ खिलाड़ियों को निकालने की बात हो रही है, उनमें से अधिकांश अब तक के अभ्यास मैचों या ईरानी ट्रॉफी मैचों में अधिक सफल नहीं रहे हैं। खुद धोनी का फॉर्म ढीला- ढाला चल रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम दिमागी खेल खेलने में माहिर है। उनके सामने सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक चतुराई भी जरूरी होती है सफलता के लिए। यह चतुराई अनुभव के कारण वरिष्ठ खिलाड़ियों में है। इस ऑस्ट्रेलियाई अग्नि परीक्षा में युवा ब्रिगेड सफल हो सकेगी, यह जरूरी नहीं। अगर उसे सफलता नहीं मिली तो वरिष्ठ खिलाड़ियों के सिर पर लटकी तलवार कुछ समय के लिए हट सकती है।

ये सारे दांव गांगुली ने अपनी संन्यास की चाल में छिपा रखे हैं। दिमागी खेल खेलने में उन्हें कितनी महारत हासिल है, यह बीसीसीआई से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जानते हैं। पूछिए रिकी पोंटिंग से जिन्हें कभी टॉस के लिए मैदान पर 20 मिनट इंतजार करवा कर भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने औकात बताई थी।

इसी दिमाग के बल पर तो सौरव ने ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान को उन्हीं की धरती पर हराया था। बीसीसीआई उनके हाथ से बल्ला छीन सकती है, उनके दिमाग की धार कुंद नहीं कर सकती।

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सौरव गांगुली ने संन्यास लेने की घोषणा की

October 7th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

भारतीय क्रिकेट के एक और बेहतरीन कप्तान और खिलाड़ी को बीसीसीआई के दबाव के आगे झुकना पड़ा।

पिछले साल के “सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर” चुने जाने वाले सौरव गांगुली ने लगातार टीम से बाहर रखे के दबाव के आगे आखिर आज क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर ही दी।

सौरव ने बेंगलुरू की एक पत्रकार वार्ता में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 9 अक्टूबर से आरंभ हो रही टेस्ट श्रृंखला उनके करियर की आखिरी श्रृंखला होगी, इसके बाद वे क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

धोनी के कलेजे को बड़ी ठंडक मिली होगी। सचिन कप्तान बनना नहीं चाहते, कुम्बले और द्रविड को अब टीम से निकालना बोर्ड के लिए जरा भी मुश्किल नहीं होगा।

बधाई धोनी, अब तुम्हारे लिए मैदान खाली है।

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सौरव गांगुली, टेस्ट टीम में स्वागत है

October 1st, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

आखिरकार सौरव गांगुली को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल कर ही लिया गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 9 अक्टूबर से आरंभ हो रही टेस्ट श्रृंखला के पहले दो टेस्ट मैचों के लिए आज भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा की गई जिसमें सौरव गांगुली का नाम भी शामिल है।

एक मुश्किल है, आज जो टीम घोषित की गई है, वह 15 खिलाड़ियों की है। इनमें से सिर्फ 11 ही मैदान पर उतरेंगे टेस्ट मैच में। क्या सौरव गांगुली उनमें से एक होंगे?

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के वर्तमान आकाओं पर हमें एक रत्ती यकीन नहीं है, इसलिए 9 तारीख तक हम यकीन नहीं करने वाले कि गांगुली को टेस्ट मैच में वाकई खेलने का मौका मिलेगा। जिस दिन अंतिम 11 खिलड़ियों की घोषणा होगी, तब तक गांगुली के प्रशंसकों को दिल थाम कर बैठना होगा।

बड़ी चर्चा हो रही है कि बोर्ड ने गांगुली से सौदा किया है कि टेस्ट टीम में तभी आओगे जब ऑस्ट्रेलिया के साथ श्रृंखला के बाद संन्यास लेने की घोषणा करोगे।

अगर कोई एक क्षण के लिए भी विश्वास करता है कि सौरव ऎसी किसी “ब्लैकमेलिंग” के आगे सिर झुकाएंगे तो शायद उसे गांगुली के खेल जीवन के बारे में ज्यादा नहीं मालूम।

जो शख्स ग्रेग चैपल जैसे कुटिल, षड्यंत्रकारी कोच और उसका समर्थन कर रही बीसीसीआई की संयुक्त ताकत के आगे नहीं झुका, उसे झुकाने की ताकत आज के क्रिकेट आका नहीं रखते।

इसीलिए, जब चयन के बाद गांगुली से टीवी पत्रकारों ने पूछा कि क्या उन्होंने बोर्ड के साथ संन्यास लेने की कोई “डील” की है तो सौरव ने थोड़ी नाराजगी से कहा कि यह सब झूठ है।

तो इंतजार कीजिए 9 अक्टूबर से शुरू होने वाले पहले मैच का।

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सचिन, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेंगे या नहीं?

September 22nd, 2008 by Administrator | 1 Comment | Filed in चर्चित चेहरे

सचिन तेंडुलकर की “फिटनेस” को लेकर बड़ी विरोधाभासी बातें सामने आ रही हैं।

(पिछले माह श्रीलंका के खिलाफ तीसरे टेस्ट में क्षेत्ररक्षण करते हुए उनकी कोहनी में चोट लग गई थी जिसके कारण उन्हें दौरा अधूरा छोड़ कर देश लौटना पड़ा था)।

पहले कहा गया था कि सचिन बिल्कुल फिट हैं और इसी आधार पर ईरानी ट्रॉफी के लिए उनका चयन भी हो गया था।

ईरानी ट्रॉफी का मैच बुधवार, 24 सितम्बर से शेष भारत और रणजी विजेता दिल्ली के बीच वडोदरा में खेला जाएगा।

लेकिन फिर क्रिकेट बोर्ड की तरफ से कहा गया कि सचिन अभी भी चोट से पूरी तरह उबरे नहीं हैं और वे ईरानी ट्रॉफी नहीं खेलेंगे। उनकी जगह एस. बद्रीनाथ को टीम में जगह दी गई है। तब यह भी कहा गया कि सचिन, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला शुरू होने तक पूरी तरह “फिट” हो जाएंगे।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला टेस्ट मैच 9 अक्टूबर से शुरू होगा।

रविवार को एक विदेशी समाचार एजेंसी ने खबर दी कि सचिन अभी भी फिट नहीं हैं और संभवत: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला नहीं खेल पाएंगे।

अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव निरंजन शाह ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा है कि नहीं, सचिन जल्द ही ठीक जो जाएंगे और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू श्रृंखला खेलेंगे।

माजरा क्या है पता नहीं। अब अगले महीने की 9 तारीख से तक इसी तरह खबरें / अफवाहें उड़ती रहेंगी कि सचिन खेलेंगे/ नहीं खेलेंगे।

एक बेचारे सौरव गांगुली हैं, फिट होते हुए भी उन्हें पता नहीं चल पाता कि वे कब खेलेंगे और कब नहीं खेलेंगे।

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सौरव गांगुली बंगाल टीम के कप्तान बनेंगे?

September 10th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

कोलकाता से प्रकाशित होने वाले अखबार “ द टेलीग्राफ” ने खबर दी है कि पश्चिम बंगाल क्रिकेट संघ अब सौरव गांगुली को रणजी टीम की कप्तानी देने जा रहा है।

अखबार के मुताबिक, “कैब” ( क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बेंगाल) सौरव गांगुली को रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का कप्तान बनने का न्योता देगा।

सौरव इसे स्वीकार करेंगे या नहीं, यह भविष्य बताएगा।

उधर “टाइम्स ऑफ इंडिया” में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक सौरव के पास क्रिकेट के अलावा भी एक नए करियर का रास्ता है जो वे शायद अपना भी लें। गांगुली के पास इन दिनों कई टीवी चैनलों के प्रस्ताव हैं कि वे उनके कुछ कार्यक्रम “होस्ट’ करें। सौरव की विज्ञापन जगत में भी खासी मांग है और उनके लिखे हुए स्तंभ संचार माध्यमों में सबसे ऊंची कीमत पाते हैं।

देश ही क्यों, अब तो विदेशी कंपनियां भी सौरव को अपने विज्ञापनों में इस्तेमाल के लिए ललचाने लगी हैं। उदाहरण है ब्रिटेन की कंपनी “वाइके” जिसने सौरव को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया है और उसके प्रचार में गांगुली का पहला इंटरव्यू ही मीडिया मे छा गया।
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मेरा रिटायरमेंट? भूल जाओ- सौरव गांगुली बोले

September 9th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

ऎसा भाव सिर्फ “दादा” दिखा सकते हैं।

भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा ईरानी ट्रॉफी की टीम में नहीं लिए जाने के बाद भी सौरव गांगुली क्रिकेट से रिटायर होने के मूड में नजर नहीं आते। लंदन के एक अखबार “ द सन” को दिए एक इंटरव्यू में गांगुली ने कहा कि अभी तो वे दो साल और क्रिकेट खेल सकते हैं।

सौरव गांगुली का यह इंटरव्यू आज ही छपा है। जब “सन” के पत्रकार ने उनसे पहला सवाल यह पूछा कि अब खेल जीवन के खात्मे पर आकर क्या उन्हें क्रिकेट से दूर जाना अखर रहा है, तो गांगुली ने छूटते ही कहा, “ अरे, अभी तो मैं दो साल और क्रिकेट खेल सकता हूं!”

सौरव ने इस इंटरव्यू में बहुत सी बाते कहीं, मसलन:

“आईपीएल एक मूवी शो की तरह है क्योंकि उसमें बड़े- बड़े (क्रिकेट) स्टार होते हैं और टीम के मालिक भी फिल्म सितारे होते हैं।”

” 2011 के विश्व कप के लिए नए खिलाड़ियों के लिए सीनियर खिलाड़ियों को जगह बना देनी चाहिए।“

” टेस्ट और 20-20 से मैं एक साथ संन्यास लूंगा”।

यहां पढ़िए सौरव गांगुली का पूरा इंटरव्यू:

वैसे बता दें कि सौरव गांगुली को ब्रिटिश कंपनी “वाइके” ने अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया है और उसी सिलसिले में वे लंदन में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

यह कंपनी इंटरनेट टेलीफोन सुविधा उपलब्ध कराती है। लगता है “दादा” के जरिए वे अप्रवासी भारतीय ग्राहकों को आकृष्ट करना चाहते हैं।

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अगर डॉन ब्रॅडमैन भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी होते तो?

August 27th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

आज सर डॉन ब्रैडमैन की 100वीं जयंती है।

अगर डॉन ब्रॅडमैन आज के भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी होते तो? तो उन्हें धोनी की टीम में जगह नहीं मिलती:) ऑस्ट्रेलिया के थे इसलिए 40 साल की उम्र तक क्रिकेट खेल कर रिटायर हुए थे। भारतीय क्रिकेट में तो सिर्फ “ यंग” होना ही प्रतिभा की निशानी है। “सीनियर” हुए यानी कचरे के काबिल हो गए।

सर डॉन का निधन 92 वर्ष की आयु में सन 2001 में एडीलेड में हुआ था।

उन्होंने 52 टेस्ट मैचों के छोटे से करियर में 29 शतक और 13 अर्धशतक लगाए थे।

यानी 52 में से 42 टेस्ट मैचों में उन्होंने या तो शतक या अर्धशतक लगाया था। इनमें 12 दोहरे शतक थे। इन 12 में से दो पारियों में उन्होंने 300 रनों का आंकड़ा पार किया ( 334 और 304) और एक बार 299 रन बनाए।

1931 में उन्होंने एक मैच में सिर्फ तीन ओवरों में 100 रन बना दिए थे!

अपने खेल जीवन की आखिरी पारी में अगर में चार रन बना लेते तो उनका टेस्ट औसत 100 हो जाता। लेकिन यह क्रिकेट की अनिश्चितता है कि डॉन ब्रैडमैन जैसा महानतम खिलाड़ी अपनी आखिरी पारी में शून्य पर आउट हो गया!
यह मैच उन्होंने इंग्लैण्ड के खिलाफ 1948 में खेला था। ऑस्ट्रेलिया इसमें सिर्फ एक पारी खेल पाया और ब्रैडमैन ने शून्य बनाया। कहा जाता है कि ब्रैडमैन को चार रन बनाने देने के लिए न सिर्फ विपक्षी टीम बल्कि उस मैच के अंपायरों तक ने फिर से खेलने का अनुरोध किया था, लेकिन ब्रैडमैन ने उनकी प्रार्थना अस्वीकार कर दी और शून्य पर आउट होकर पेवेलियन लौट आए।

आखिरी बार ब्रैडमैन का विकेट लेने वाले गेंदबाज थे ड्ब्ल्यू ई हॉलीस। ब्रैडमैन ने उनकी दो गेंदे खेलीं थी, और फिर हॉलीस ने उन्हें शून्य पर बोल्ड कर दिया था।

कल्पना कीजिए उस क्षण मैदान में कैसी निस्तब्धता छाई होगी।

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