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Archive for the ‘चर्चित चेहरे’ Category

अगर डॉन ब्रॅडमैन भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी होते तो?

August 27th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

आज सर डॉन ब्रैडमैन की 100वीं जयंती है।

अगर डॉन ब्रॅडमैन आज के भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी होते तो? तो उन्हें धोनी की टीम में जगह नहीं मिलती:) ऑस्ट्रेलिया के थे इसलिए 40 साल की उम्र तक क्रिकेट खेल कर रिटायर हुए थे। भारतीय क्रिकेट में तो सिर्फ “ यंग” होना ही प्रतिभा की निशानी है। “सीनियर” हुए यानी कचरे के काबिल हो गए।

सर डॉन का निधन 92 वर्ष की आयु में सन 2001 में एडीलेड में हुआ था।

उन्होंने 52 टेस्ट मैचों के छोटे से करियर में 29 शतक और 13 अर्धशतक लगाए थे।

यानी 52 में से 42 टेस्ट मैचों में उन्होंने या तो शतक या अर्धशतक लगाया था। इनमें 12 दोहरे शतक थे। इन 12 में से दो पारियों में उन्होंने 300 रनों का आंकड़ा पार किया ( 334 और 304) और एक बार 299 रन बनाए।

1931 में उन्होंने एक मैच में सिर्फ तीन ओवरों में 100 रन बना दिए थे!

अपने खेल जीवन की आखिरी पारी में अगर में चार रन बना लेते तो उनका टेस्ट औसत 100 हो जाता। लेकिन यह क्रिकेट की अनिश्चितता है कि डॉन ब्रैडमैन जैसा महानतम खिलाड़ी अपनी आखिरी पारी में शून्य पर आउट हो गया!
यह मैच उन्होंने इंग्लैण्ड के खिलाफ 1948 में खेला था। ऑस्ट्रेलिया इसमें सिर्फ एक पारी खेल पाया और ब्रैडमैन ने शून्य बनाया। कहा जाता है कि ब्रैडमैन को चार रन बनाने देने के लिए न सिर्फ विपक्षी टीम बल्कि उस मैच के अंपायरों तक ने फिर से खेलने का अनुरोध किया था, लेकिन ब्रैडमैन ने उनकी प्रार्थना अस्वीकार कर दी और शून्य पर आउट होकर पेवेलियन लौट आए।

आखिरी बार ब्रैडमैन का विकेट लेने वाले गेंदबाज थे ड्ब्ल्यू ई हॉलीस। ब्रैडमैन ने उनकी दो गेंदे खेलीं थी, और फिर हॉलीस ने उन्हें शून्य पर बोल्ड कर दिया था।

कल्पना कीजिए उस क्षण मैदान में कैसी निस्तब्धता छाई होगी।

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चंद्रा, मुकेश और पिज्जा

August 26th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

“टेन स्पोर्ट्स “ पर “चंद्रा” का इंटरव्यू दिखाया जा रहा था। अच्छा लगा भारत के इस महान गुगली गेंदबाज को देख कर। चंद्रा की दाहिनी कलाई में बचपन में पोलियो हो गया था, जो आगे चल कर उनकी “लेग स्पिन” गेंदबाजी के लिए वरदान बन गया।

संयोग से, चंद्रा (भागवत सुब्रह्म्ण्य चंद्रशेखर) को मुकेश के गाने बहुत पसंद हैं और कल मुकेश की पुण्यतिथि भी है। सुनील गावस्कर ने बरसों पहले चंद्रा के इस “मुकेश प्रेम” का एक किस्सा लिखा था।

मुंबई- कर्नाटक के एक रणजी ट्रॉफी में गावस्कर बल्लेबाजी कर रहे थे और उन्हें गेंदबाजी कर रहे थे चंद्रा। वैसे तो गावस्कर अच्छा खेल रहे थे लेकिन तभी खिलाड़ियों के कानों में मुकेश के एक गीत की आवाज सुनाई पड़ी। स्टेडियम में बैठा एक दर्शक के ट्रांजिस्टर पर वह गीत बज रहा था। गीत क्या सुनाई दिया, चंद्रा की गेंद घातक हो गई और गावस्कर का विकेट ले उड़ी। लेकिन चंद्रा को होश ही नहीं था कि उन्होंने गावस्कर जैसा महत्वपूर्ण विकेट ले लिया है। वे फॉलो – थ्रू में गावस्कर के पास पहुंचे और उस गीत के बारे में पूछने लगे “सुना क्या”?

चंद्रा का पिज्जा प्रेम:

चंद्रा के बारे में एक और बात याद आई। 1977-78 में भारत की टीम बिशनसिंह बेदी के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई थी। आप कल्पना कर सकते हैं कि उस समय हमारी टीम की हालत विदेशी पिचों पर तेज गेंदबाजों के कारण क्या होती होगी। लेकिन उस श्रृंखला में चंद्रा की घातक गेंदबाजी की बदौलत भारत ने 2 टेस्ट मैच जीते थे और 3-2 के बारीक अंतर से श्रृंखला हारा था। चंद्रा ने मेलबर्न टेस्ट में 12 विकेट लिए थे, दोनों पारियों में 6-6 विकेट।

ब्रिस्बेन और पर्थ के पहले दो टेस्ट हार कर भारतीय टीम मेलबर्न पहुंची थी। चंद्रा को पिज्जा बहुत पसंद था। तब तो पिज्जा सिर्फ विदेशी दौरों में खाने को मिलता था। ऑस्ट्रेलियाई मैनेजर ने उनसे कहा, चंद्रा एक पारी में 6 विकेट लोगे तो तुम्हें मैं पिज्जा खिलाऊंगा। चंद्रा ने मेलबर्न टेस्ट की दोनों पारियों में 6-6 विकेट ले लिए और ऑस्ट्रेलिया वह टेस्ट मैच हार गया। भारत 222 रनों से वह मैच जीता था। भारत की ऑस्ट्रेलिया में वह पहली जीत थी।

उससे अगला मैच ( सिडनी में) भारत ने पारी और 2 रनों से जीता था।
लेकिन एडीलेड का आखिरी मैच भारत सिर्फ 47 रनों से हार गया और वह श्रृंखला जीतने से वंचित रह गया था।

चंद्रा की गेंदबाजी जितनी महान थी, उनकी बल्लेबाजी भी उतनी ही “महान” कहलाती थी। अगर चंद्रा एक गेंद भी खेल लेते तो वह रेकॉर्ड बन जाता था। ऑस्ट्रेलिया के साथ उस श्रृंखला में चंद्रा ने कुल 28 विकेट लिए थे। लेकिन रन बनाए थे सिर्फ चार। उसमें भी उनका उच्चतम स्कोर था 2 रन।

चंद्रा ने उस श्रृंखला में “ मैन ऑफ दि सीरीज” का पुरस्कार जीता था। पुरस्कार के साथ उन्हें एक बल्ला भी भेंट किया गया जिसके बीचों-बीच एक बड़ा सा गोल छेद था, उनकी बल्लेबाजी की “विशेषता” दिखाने के लिए!

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रिटायरमेंट के बाद क्या करना चाहते हैं सौरव?

August 26th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

जब सौरव गांगुली ने सौ टेस्ट मैच पूरे किए तो तो हर्षा भोगले ने उनसे “स्टार क्रिकेट” पर कुछ दिलचस्प बातें की थीं।

हर्षा ने सौरव से पूछा, क्या कभी सोचा क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे?

सौरव का जवाब था- “हां बिलकुल, बहुत सोचता हूं, बहुत कुछ करना है। मेरे परिवार का बिजनेस है, उसे संभालना है क्योंकि मेरे पिता अब बूढ़े हो रहे हैं। अपने खुद के भी कई काम मैंने शुरू किए हैं। एक स्कूल खोलना चाहता हूं, क्रिकेट का नही, पढ़ाई का जहां बच्चों को सिखाया जा सके।”

धोनी को भी उसी स्कूल में दाखिला दे देना दादा :)

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