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Archive for September, 2008

सौरव गांगुली बंगाल टीम के कप्तान बनेंगे?

September 10th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

कोलकाता से प्रकाशित होने वाले अखबार “ द टेलीग्राफ” ने खबर दी है कि पश्चिम बंगाल क्रिकेट संघ अब सौरव गांगुली को रणजी टीम की कप्तानी देने जा रहा है।

अखबार के मुताबिक, “कैब” ( क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बेंगाल) सौरव गांगुली को रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का कप्तान बनने का न्योता देगा।

सौरव इसे स्वीकार करेंगे या नहीं, यह भविष्य बताएगा।

उधर “टाइम्स ऑफ इंडिया” में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक सौरव के पास क्रिकेट के अलावा भी एक नए करियर का रास्ता है जो वे शायद अपना भी लें। गांगुली के पास इन दिनों कई टीवी चैनलों के प्रस्ताव हैं कि वे उनके कुछ कार्यक्रम “होस्ट’ करें। सौरव की विज्ञापन जगत में भी खासी मांग है और उनके लिखे हुए स्तंभ संचार माध्यमों में सबसे ऊंची कीमत पाते हैं।

देश ही क्यों, अब तो विदेशी कंपनियां भी सौरव को अपने विज्ञापनों में इस्तेमाल के लिए ललचाने लगी हैं। उदाहरण है ब्रिटेन की कंपनी “वाइके” जिसने सौरव को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया है और उसके प्रचार में गांगुली का पहला इंटरव्यू ही मीडिया मे छा गया।
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मेरा रिटायरमेंट? भूल जाओ- सौरव गांगुली बोले

September 9th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

ऎसा भाव सिर्फ “दादा” दिखा सकते हैं।

भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा ईरानी ट्रॉफी की टीम में नहीं लिए जाने के बाद भी सौरव गांगुली क्रिकेट से रिटायर होने के मूड में नजर नहीं आते। लंदन के एक अखबार “ द सन” को दिए एक इंटरव्यू में गांगुली ने कहा कि अभी तो वे दो साल और क्रिकेट खेल सकते हैं।

सौरव गांगुली का यह इंटरव्यू आज ही छपा है। जब “सन” के पत्रकार ने उनसे पहला सवाल यह पूछा कि अब खेल जीवन के खात्मे पर आकर क्या उन्हें क्रिकेट से दूर जाना अखर रहा है, तो गांगुली ने छूटते ही कहा, “ अरे, अभी तो मैं दो साल और क्रिकेट खेल सकता हूं!”

सौरव ने इस इंटरव्यू में बहुत सी बाते कहीं, मसलन:

“आईपीएल एक मूवी शो की तरह है क्योंकि उसमें बड़े- बड़े (क्रिकेट) स्टार होते हैं और टीम के मालिक भी फिल्म सितारे होते हैं।”

” 2011 के विश्व कप के लिए नए खिलाड़ियों के लिए सीनियर खिलाड़ियों को जगह बना देनी चाहिए।“

” टेस्ट और 20-20 से मैं एक साथ संन्यास लूंगा”।

यहां पढ़िए सौरव गांगुली का पूरा इंटरव्यू:

वैसे बता दें कि सौरव गांगुली को ब्रिटिश कंपनी “वाइके” ने अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया है और उसी सिलसिले में वे लंदन में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

यह कंपनी इंटरनेट टेलीफोन सुविधा उपलब्ध कराती है। लगता है “दादा” के जरिए वे अप्रवासी भारतीय ग्राहकों को आकृष्ट करना चाहते हैं।

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सौरव गांगुली को ईरानी ट्रॉफी टीम से बाहर किया गया

September 8th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

शायद भारत में क्रिकेट बोर्ड के अन्याय की इससे बड़ी मिसाल नहीं हो सकती।

सौरव गांगुली को ईरानी ट्रॉफी में खेलने के लिए शेष भारत की टीम में शामिल नहीं किया गया है।

पिछले वर्ष के “सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर” का खिताब जीतने वाले इस खिलाड़ी को पहले श्रीलंका के खिलाफ एक दिवसीय श्रृंखला से बाहर किया गया, और अब ईरानी ट्रॉफी में भी नहीं खेलने दिया जा रहा है।

इसके बाद उन्हें भारतीय टीम से बाहर करना आसान हो जाएगा, यह कह कर कि दूसरे खिलाड़ी उनसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्रिकेट में अन्याय की इससे बड़ी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी।

काश, भारतीय क्रिकेट प्रेमी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते, कुछ करते लेकिन क्रिकेट बोर्ड को इस तरह मनमानी नहीं करने देते।

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धोनी “म्यूजिक एल्बम” में

September 7th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी अब एक म्यूजिक एल्बम में काम करेंगे।

धोनी ने कहा कि यह “एक नया कैरियर है” और उन्हें उम्मीद है कि उनके फैन उन्हें इस रूप में भी पसंद अकरेंगे।

हमारी तो सलाह है कि धोनी अब “फुल टाइम” फिल्मी कैरियर अपना ही लें। पार्टियों में जाना, बॉलीवुड के लोगों से मिलना- जुलना, विज्ञापनों में काम करना- उनके सारे शौक पूरे हो जाएंगे और “सीनियर्स” को भी छुट्टी मिलेगी खेलने की:)

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“ओटी” तब और अब

September 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अनिल कुम्बले की उम्र अब ढल रही है और धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दी जानी चाहिए।

उम्र का बहाना बना कर विद्रोही खिलाड़ियों से छुटकारा पाना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए नई बात नहीं है।

1983 का विश्व कप: तब भी टीम में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थे जो क्रिकेट बोर्ड की आंखों का कांटा थे और अच्छा खेलने के बावजूद उन्हें येन-केन प्रकारेण टीम से निकालने की कोशिश जारी थी।

ऎसे खिलाड़ियों में पहला नम्बर था मोहिन्दर अमरनाथ का। तब भी क्रिकेट चयनकर्ता यह कहते फिरते थे कि “ओवर 30” खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता ढल जाती है और उन्हे संन्यास ले लेना चाहिए।

’83 के विश्व कप के समय मोहिन्दर 33 वर्ष के थे और उन पर “उम्र ज्यादा हो जाने के कारण” टीम से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा था।
मोहिन्दर ने इस कोशिश का जवाब अपने चमत्कारी प्रदर्शन से दिया और विश्वकप सेमीफाइनल और फाइनल में “मैन ऑफ द मैच” जीत कर चयनकर्ताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

सुनील गावस्कर ने बाद में अपने संस्मरण में लिखा था कि उस विश्वकप के दौरान जब भी कोई वरिष्ठ खिलाड़ी अच्छा कैच लेता या बॉलिंग करता तो बाकी खिलाड़ी “ओटी- ओटी” ( ओवर थर्टी) चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाया करते थे।

संयोगवश, मोहिन्दर अमरनाथ से बोर्ड इसलिए खफा रहता था क्योंकि मोहिन्दर ने एक बार चयनकर्ताओं को “ बंच ऑफ जोकर्स” ( जोकरों क झुंड) कह दिया था। उसकी कीमत मोहिन्दर अब तक चुका रहे हैं।

लेकिन यह बात बोर्ड ने आसानी से भुला दी कि वास्तव में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” सबसे पहले किस खिलाड़ी ने कहा था. क्योंकि उस खिलाड़ी की लोकप्रियता, महान खेल और उसके प्रदेश की क्रिकेट- ताकत के कारण बोर्ड उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

वह खिलाड़ी था सुनील गावस्कर। 1980 के दशक में उन्होंने चयनकर्ताओं पर यह टिप्पणी की थी जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय रही लेकिन बोर्ड ने उसे अनदेखा कर दिया।

लेकिन वही टिप्पणी जब मोहिन्दर अमरनाथ ने की तो उन्हें भारतीय क्रिकेट से सदा के लिए अछूत बना दिया गया।

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धोनी को टेस्ट कप्तान बनाने की तैयारी?

September 2nd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने बयान दिया है कि धोनी अब टेस्ट टीम की कप्तानी के लायक तैयार हो चुके हैं।
यानी सिंहासन खाली करो कि खेल रत्न आते हैं।

वही “खेलरत्न” जो थके होने के कारण श्रीलंका से टेस्ट श्रृंखला छोड़ कर देश लौट आए थे और यहां रिएलिटी टी वी शो, विज्ञापन की शूटिंग और बॉलीवुड के फिल्मी सितारों के साथ अपना बर्थडे मनाने में व्यस्त हो गए थे।

कर्स्टन का कहना है कि, अभी कोई जल्दी नहीं है ( धोनी की ताजपोशी की), कुम्बले अच्छा खेल रहे हैं लेकिन उनकी उम्र अब ढलान पर है।

शायद गैरी को क्रिकेट की दुनिया के बेताज बादशाह, सर डॉन ब्रैडमैन के बारे में ज्यादा पता नहीं है। वर्ना उन्हें यह भी पता होता कि सर डॉन 40 साल की उम्र तक खेल कर रिटायर हुए थे और उनके बारे में कभी किसी ने नहीं कहा कि उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए क्योंकि उनकी “उम्र ढलान पर है।”

क्या यह आश्चर्य की बात नहीं, कि दुनिया की किसी भी क्रिकेट टीम में उम्र की बात उठा कर खिलाड़ियों को रिटायर होने के लिए नहीं कहा जाता लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम में जब देखो तब “उम्र ज्यादा हो गई है, उम्र ज्यादा हो गई है” कह कर विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को टीम निकाला दिया जा रहा है।

क्या यह ऑस्ट्रेलिया में भज्जी- सायमंड्स विवाद ( दूसरा टेस्ट, सिडनी) में कुम्बले ( और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों) के बोर्ड के आगे नहीं झुकने का बदला निकाला जा रहा है? अगर आपको याद हो तो कुम्बले और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों ने तब बोर्ड की आज्ञा का उल्लंघन करते हुए, भज्जी के मामले का निपटारा होने तक कोई भी मैच खेलने से इंकार कर दिया था। यही नहीं, इन वरिष्ठ खिलाड़ियों ने बोर्ड अध्यक्ष शरद पवार के लगातार बयानों के बावजूद तीसरे टेस्ट के लिए पर्थ जाने से भी इंकार कर दिया था।

आप क्या सोचते हैं, क्रिकेट बोर्ड ने आज तक खिलाड़ियों के तेज तेवर बर्दाश्त किए हैं जो अब करेगा? धोनी के रूप में उसे एक मह्त्वाकांक्षीमोहरा मिल गया है जिसे आगे कर क्रिकेट बोर्ड वरिष्ठ खिलाड़ियों को अपनी बात ठुकराने की सजा दे रहा है।

गांगुली, द्रविड और कुम्बले को पहले ही एक दिवसीय टीम से बाहर कर दिया गया था, अब उन्हें वन डे टीम से निकालने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। बस एक सचिन को हाथ नहीं लगा पाता बोर्ड क्योंकि एक तो सचिन को पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियोंके बीच वही सम्मान प्राप्त है जो सर डॉन ब्रैडमैन को प्राप्त है। दूसरे, महाराष्ट्र की क्रिकेट लॉबी इतनी सशक्त है कि सचिन का बाल भी बांका हुआ तो क्रिकेट जगत में विद्रोह हो जाएगा।

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युवराज सिंह टीम में क्यों हैं?

September 1st, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

युवराज सिंह टीम में क्यों हैं?

यह सवाल श्रीलंका दौरे में उनके प्रदर्शन के बाद लगभग हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के दिमाग में होगा।

उनके प्रदर्शन के आंकड़े देखिए:

कुल पांच एकदिवसीय मैच खेले युवराज ने।

पांच पारियों में कुल 72 रन बनाए।

उनका उच्चतम स्कोर था 23 रन।

उनका बल्लेबाजी औसत रहा 14.40।

सिर्फ यही श्रृंखला ही नहीं, इस पूरे वर्ष ( 2008) में युवराज का प्रदर्शन निम्नस्तरीय रहा है। इस वर्ष अब तक उन्होंने कुल 22 मैचों में 22 पारियां खेली हैं और उनमें 25.8 रनों के औसत से कुल 568 रन बनाए हैं।

मैदान के बाहर उनके बर्ताव का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोलम्बो में खेले गए आखिरी एकदिवसीय मैच से पहले वे अलस्सुबह 2 बजे तक पार्टी मना रहे थे।

कहा जा सकता है कि पार्टीबाजी करना उनका व्यक्तिगत मामला है। बिल्कुल यह उनका व्यक्तिगत मामला है, लेकिन अगर इसका असर उनके खेल पर पड़े तो यह मामला व्यक्तिगत नहीं टीम का हो जाता है।

एंड्र्यू साइमंड्स को ऑस्ट्रेलिया की टीम अगर सुबह मछली पकड़ने जाने पर टीम से निकाल सकती है तो पार्टीबाजी के चक्कर में खराब प्रदर्शन करने वाले युवराज को टीम से क्यों नहीं निकाला जा सकता?

क्या इसलिए कि वे कप्तान धोनी के मित्र हैं?

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