भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने बयान दिया है कि धोनी अब टेस्ट टीम की कप्तानी के लायक तैयार हो चुके हैं।
यानी सिंहासन खाली करो कि खेल रत्न आते हैं।
वही “खेलरत्न” जो थके होने के कारण श्रीलंका से टेस्ट श्रृंखला छोड़ कर देश लौट आए थे और यहां रिएलिटी टी वी शो, विज्ञापन की शूटिंग और बॉलीवुड के फिल्मी सितारों के साथ अपना बर्थडे मनाने में व्यस्त हो गए थे।
कर्स्टन का कहना है कि, अभी कोई जल्दी नहीं है ( धोनी की ताजपोशी की), कुम्बले अच्छा खेल रहे हैं लेकिन उनकी उम्र अब ढलान पर है।
शायद गैरी को क्रिकेट की दुनिया के बेताज बादशाह, सर डॉन ब्रैडमैन के बारे में ज्यादा पता नहीं है। वर्ना उन्हें यह भी पता होता कि सर डॉन 40 साल की उम्र तक खेल कर रिटायर हुए थे और उनके बारे में कभी किसी ने नहीं कहा कि उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए क्योंकि उनकी “उम्र ढलान पर है।”
क्या यह आश्चर्य की बात नहीं, कि दुनिया की किसी भी क्रिकेट टीम में उम्र की बात उठा कर खिलाड़ियों को रिटायर होने के लिए नहीं कहा जाता लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम में जब देखो तब “उम्र ज्यादा हो गई है, उम्र ज्यादा हो गई है” कह कर विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को टीम निकाला दिया जा रहा है।
क्या यह ऑस्ट्रेलिया में भज्जी- सायमंड्स विवाद ( दूसरा टेस्ट, सिडनी) में कुम्बले ( और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों) के बोर्ड के आगे नहीं झुकने का बदला निकाला जा रहा है? अगर आपको याद हो तो कुम्बले और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों ने तब बोर्ड की आज्ञा का उल्लंघन करते हुए, भज्जी के मामले का निपटारा होने तक कोई भी मैच खेलने से इंकार कर दिया था। यही नहीं, इन वरिष्ठ खिलाड़ियों ने बोर्ड अध्यक्ष शरद पवार के लगातार बयानों के बावजूद तीसरे टेस्ट के लिए पर्थ जाने से भी इंकार कर दिया था।
आप क्या सोचते हैं, क्रिकेट बोर्ड ने आज तक खिलाड़ियों के तेज तेवर बर्दाश्त किए हैं जो अब करेगा? धोनी के रूप में उसे एक मह्त्वाकांक्षीमोहरा मिल गया है जिसे आगे कर क्रिकेट बोर्ड वरिष्ठ खिलाड़ियों को अपनी बात ठुकराने की सजा दे रहा है।
गांगुली, द्रविड और कुम्बले को पहले ही एक दिवसीय टीम से बाहर कर दिया गया था, अब उन्हें वन डे टीम से निकालने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। बस एक सचिन को हाथ नहीं लगा पाता बोर्ड क्योंकि एक तो सचिन को पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियोंके बीच वही सम्मान प्राप्त है जो सर डॉन ब्रैडमैन को प्राप्त है। दूसरे, महाराष्ट्र की क्रिकेट लॉबी इतनी सशक्त है कि सचिन का बाल भी बांका हुआ तो क्रिकेट जगत में विद्रोह हो जाएगा।
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