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Archive for January, 2009

धोनी साहब “बिज़ी” हैं

January 12th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

खबरों के मुताबिक भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी इतने “बिज़ी” हैं कि घरेलू क्रिकेट खेलना तो दूर, क्षेत्रीय टीम के चयनकर्ताओं से बात तक करने के लिए वे उपलब्ध नहीं हैं।

पूरी खबर यहां पढ़िए
इस खबर के अनुसार, आगामी दिलीप ट्रॉफी के लिए पूर्व क्षेत्र की कप्तानी धोनी की जगह उड़ीसा के शिवसुंदर दास को सिर्फ इसलिए देनी पड़ी क्योंकि घरेलू टीम के चयनकर्ताओं की लाख कोशिश के बावजूद धोनी से उनका संपर्क नहीं हो पाया।

हां भई, अब धोनी रेलवे के टीसी थोड़े ही हैं जो क्षेत्रीय चयनकर्ताओं का फोन आए तो सिर के बल खड़े हो जाएं। अब तो वे राष्ट्रीय टीम के ऎसे कप्तान हैं जिसने “सीनियर खिलाड़ियों” की टीम से छुट्टी कर दी।

जय हो धोनी महाराज की।

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नए साल की शुरूआत में बढ़िया क्रिकेट

January 7th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैच खबरें

इसीलिए तो कहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है।

आज सिडनी में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच वर्तमान श्रंखला के तीसरे और अंतिम टेस्ट का आखिरी दिन था। हालत यह थी कि ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए दक्षिण अफ्रीका का सिर्फ एक विकेट और लेना था, जबकि दक्षिण अफ्रीका की आखिरी जोड़ी को सिर्फ 18 गेंद और खेलनी थीं मैच ड्रॉ कराने के लिए, मैच समाप्त होने में सिर्फ पांच मिनट बाकी थे और बची- खुची कसर पूरी कर रहे थे मैदान पर घिरते बादल।

मैच का आखिरी दिन और आखिरी पल..

ऑस्ट्रेलिया आखिरी विकेट झटक कर मैच जीत पाएगा या दक्षिण अफ्रीका मैच ड्रॉ करा कर ऑस्ट्रेलिया के हाथों से यह नाम-बचाऊ मैच दूर कर देगा- हर एक गेंद पर इसका फैसला हवा में झूलता और दर्शकों की सांसें रुक जातीं…

मैदान पर आखिरी बल्लेबाजों के रूप में मखाया एंतिनी थे और उनके साथ थे उनके कप्तान ग्रीम स्मिथ, जो बाएं हाथ में फ्रैक्चर होने के बावजूद उनके आखिरी साथी के रूप में खेलने उतरे और दर्द के बावजूद 17 मिनट तक बल्लेबाजी की। आखीर में जॉंसन ने उन्हें बोल्ड कर ऑस्ट्रेलिया के लिए मैच जीत लिया । तब अंतिम दिन का खेल समाप्त होने में सिर्फ पांच मिनट बाकी थे।

यह रोमांच 20-20 या एकदिवसीय मैचों के कुल्हाड़ी-घुमा बल्लेबाजी में कहां देखने को मिलता है?

वैसे दक्षिण अफ्रीका इस श्रृंखला के पहले दो टेस्ट जीत कर श्रृंखला पहले ही जीत चुका है, आखिरी मैच जीत कर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने थोड़ी इज्जत बचा ली है।

सिडनी से जुड़ी एक और दिलचस्प बात है। यहां खेले गए पिछले दोनों टेस्ट मैचों का फैसला मैच के अंतिम क्षणों में हुआ और दोनों बार ऑस्ट्रेलिया ही जीता।

भारत के खिलाफ पिछले वर्ष (2-6 जनवरी 2008) में मैच समाप्त होने में सिर्फ नौ मिनट बाकी थे जब माइकेल क्लार्क ने भारत का आखिरी विकेट झटक कर ऑस्ट्रेलिया को विजय दिलाई थी। और इस बार दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ (3- 7 जनवरी 2009) खेलते हुए, मैच समाप्त होने में जब सिर्फ पांच मिनट बाकी थे तब मिशेल जॉंन्सन ने आखिरी विकेट लेकर अपनी टीम को जीत दिलाई।

यानी अगली बार यदि वर्ष के आरंभ में सिडनी में टेस्ट मैच हो, ऑस्ट्रेलिया की टीम आखिरी पारी में गेंदबाजी कर रही हो और “म” अक्षर से नाम आरंभ होने वाला गेंदबाज बॉलिंग कर रहा हो तो मैच ऑस्ट्रेलिया ही जीतेगा:)

यहां पढ़िए मैच के अंतिम और रोमांचक क्षणों का हाल।

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