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Archive for June, 2009

धोनी की विदाई की तैयारी?

June 15th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

नहीं, बात सिर्फ 20-20 विश्वकप में सेमीफाइनल से भी पहले हार कर प्रतियोगिता से बाहर हो जाने की नहीं है, बात है भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की लगाम कसने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल द्वारा उठाए जा रहे कदमों की।

पहले, सेहवाग विवाद। कारण जो भी हो, इतना तय है कि धोनी और सेहवाग के बीच कुछ खटाई जरूर थी। वर्ना धोनी पूरी टीम के प्रेस कांफ्रेंस में ले जाने और उसके बाद अगली प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के साथ तू-तू मैं-मैं में नहीं उलझते।

लेकिन, बीसीसीआई ने क्या किया? चोट के कारण सेहवाग आगे किसी मैच में खेलेंगे नहीं ये तो बयान दे दिया, लेकिन सेहवाग को न तो टीम से अलग किया, न उन्हें देश वापस बुलाया। सेहवाग पहले की तरह टीम के साथ रहते रहे, यात्रा करते रहे और हर जगह टीम के साथ उसी तरह बने रहे जिस तरह मैच खेलने वाला कोई खिलाड़ी रहता है। यानी धोनी का जी जलता है तो जले, बीसीसीआई ने सेहवाग को उनके सिर पर बिठाए रखा।

धोनी के खिलाफ दूसरा संकेत था युवराज सिंह को उपकप्तान बनाए जाने का। धोनी की एक कमजोरी जगजाहिर है कि वे अपनी कप्तानी के लिए खतरा हो सकने वाले किसी खिलाड़ी को आगे नहीं बढने देते। अगर आपको याद हो, धोनी की कप्तानी के दौरान एक दौर वह भी था जब भारतीय क्रिकेट टीम में कोई उपकप्तान नहीं होता था, सिर्फ कप्तान धोनी होते थे। फिर आर.पी. सिंह को टीम में लिए जाने की जिद में धोनी ने चयनसमिति से पंगा ले लिया और कप्तानी से इस्तीफे की धमकी दे डाली। उस विवाद के बाद ही सेहवाग को चयनसमिति ने उपकप्तान नियुक्त किया था। इशारा था धोनी के लिए, कि तुम्हारे दरवाजे उत्तराधिकारी खड़ा कर दिया गया है।

अब जब सेहवाग चोट के कारण टीम से हटे तो बात उठी उपकप्तानी की। खबरों में कहा गया कि धोनी चाहते थे गंभीर बनें टीम के उपकप्तान, क्योंकि चुप्पे गंभीर से उनकी कप्तानी को कोई खतरा नहीं होता। लेकिन बोर्ड ने उनके सिर पर बिठाया युवराज सिंह को, जो न सिर्फ बड़बोले और गर्म मिजाज हैं बल्कि महत्वाकांक्षी भी हैं और भारतीय टीम की कप्तानी की होड़ में धोनी से पिछड़ने पर काफी दुखी भी हुए थे। न सिर्फ यही, इन दिनों जब धोनी लगातार बल्लेबाजी में असफल हो रहे हैं तब युवराज का बल्ला आग उगल रहा है।

20-20 विश्वकप खेलने इंग्लैण्ड गई टीम में धोनी ने जिस तरह सेहवाग विवाद में सार्वजनिक रूप से अपने जिद्दी बर्ताव का परिचय दिया, उससे लगता है क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सब्र का पैमाना छलक गया है।

अगर टीम जीतती तो शायद बोर्ड चुप रहता, लेकिन टीम के इस तरह हार कर टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद, बोर्ड को मालूम है कि भारत के क्रिकेट दीवाने भी धोनी का पक्ष नहीं लेंगे और धोनी की लगाम कसने के लिए उसके पास अच्छा मौका भी है।

सो धोनी तैयार रहें, भूतपूर्व कप्तानों की श्रेणी में खड़े होने के लिए।

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