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Posts Tagged ‘धोनी’

भारत- ऑस्ट्रेलिया एक दिवसीय श्रृंखला

November 1st, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

अब तक भारत 2-1 से श्रृंखला में आगे है। मोहाली में आज चौथा मैच होना है।
ऑस्ट्रेलिया की टीम ब्रेट ली के घायल होने और स्वदेश लौट जाने से निश्चित तौर पर कमजोर पड़ी है। इस मैच के लिए भारत की टीम भी इसी समस्या का सामना कर रही है। सेहवाग और गंभीर घायल हैं और संभवतया इस मैच में नहीं खेलेंगे।
लेकिन धोनी और युवराज अर्से बाद इस समय जबरदस्त “फॉर्म” में हैं। धोनी ने तो चार साल बाद अपना पहला शतक भी मारा; श्रृंखला के दूसरे मैच में।
देखें, चौथे मैच में क्या कमाल होता है।

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धोनी की विदाई की तैयारी?

June 15th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

नहीं, बात सिर्फ 20-20 विश्वकप में सेमीफाइनल से भी पहले हार कर प्रतियोगिता से बाहर हो जाने की नहीं है, बात है भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की लगाम कसने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल द्वारा उठाए जा रहे कदमों की।

पहले, सेहवाग विवाद। कारण जो भी हो, इतना तय है कि धोनी और सेहवाग के बीच कुछ खटाई जरूर थी। वर्ना धोनी पूरी टीम के प्रेस कांफ्रेंस में ले जाने और उसके बाद अगली प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के साथ तू-तू मैं-मैं में नहीं उलझते।

लेकिन, बीसीसीआई ने क्या किया? चोट के कारण सेहवाग आगे किसी मैच में खेलेंगे नहीं ये तो बयान दे दिया, लेकिन सेहवाग को न तो टीम से अलग किया, न उन्हें देश वापस बुलाया। सेहवाग पहले की तरह टीम के साथ रहते रहे, यात्रा करते रहे और हर जगह टीम के साथ उसी तरह बने रहे जिस तरह मैच खेलने वाला कोई खिलाड़ी रहता है। यानी धोनी का जी जलता है तो जले, बीसीसीआई ने सेहवाग को उनके सिर पर बिठाए रखा।

धोनी के खिलाफ दूसरा संकेत था युवराज सिंह को उपकप्तान बनाए जाने का। धोनी की एक कमजोरी जगजाहिर है कि वे अपनी कप्तानी के लिए खतरा हो सकने वाले किसी खिलाड़ी को आगे नहीं बढने देते। अगर आपको याद हो, धोनी की कप्तानी के दौरान एक दौर वह भी था जब भारतीय क्रिकेट टीम में कोई उपकप्तान नहीं होता था, सिर्फ कप्तान धोनी होते थे। फिर आर.पी. सिंह को टीम में लिए जाने की जिद में धोनी ने चयनसमिति से पंगा ले लिया और कप्तानी से इस्तीफे की धमकी दे डाली। उस विवाद के बाद ही सेहवाग को चयनसमिति ने उपकप्तान नियुक्त किया था। इशारा था धोनी के लिए, कि तुम्हारे दरवाजे उत्तराधिकारी खड़ा कर दिया गया है।

अब जब सेहवाग चोट के कारण टीम से हटे तो बात उठी उपकप्तानी की। खबरों में कहा गया कि धोनी चाहते थे गंभीर बनें टीम के उपकप्तान, क्योंकि चुप्पे गंभीर से उनकी कप्तानी को कोई खतरा नहीं होता। लेकिन बोर्ड ने उनके सिर पर बिठाया युवराज सिंह को, जो न सिर्फ बड़बोले और गर्म मिजाज हैं बल्कि महत्वाकांक्षी भी हैं और भारतीय टीम की कप्तानी की होड़ में धोनी से पिछड़ने पर काफी दुखी भी हुए थे। न सिर्फ यही, इन दिनों जब धोनी लगातार बल्लेबाजी में असफल हो रहे हैं तब युवराज का बल्ला आग उगल रहा है।

20-20 विश्वकप खेलने इंग्लैण्ड गई टीम में धोनी ने जिस तरह सेहवाग विवाद में सार्वजनिक रूप से अपने जिद्दी बर्ताव का परिचय दिया, उससे लगता है क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सब्र का पैमाना छलक गया है।

अगर टीम जीतती तो शायद बोर्ड चुप रहता, लेकिन टीम के इस तरह हार कर टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद, बोर्ड को मालूम है कि भारत के क्रिकेट दीवाने भी धोनी का पक्ष नहीं लेंगे और धोनी की लगाम कसने के लिए उसके पास अच्छा मौका भी है।

सो धोनी तैयार रहें, भूतपूर्व कप्तानों की श्रेणी में खड़े होने के लिए।

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सचिन दौरा छोड़ कर लौटे

February 9th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

श्रीलंका में खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम का साथ छोड़ कर सचिन तेंदुलकर कल रात देश वापस लौट आए हैं। भारतीय टीम को अभी कल (10 जनवरी) को श्रीलंका के साथ 20-20 मैच खेलना है।

अब सचिन की वापसी को लेकर भले ही टीम प्रबंधन यह दलील दे कि 20-20 मैच में सचिन नहीं खेलने वाले थे इसलिए वे वापस लौट आए, लेकिन सचिन को करीब से जानने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि सचिन कभी भी, किसी भी हालत में दौरे के बीच से टीम को छोड़ कर नहीं लौटते हैं। भले ही वे टीम में रहें या न रहें। आज तक अगर सचिन ने कोई दौरा बीच में छोड़ा है तो वह सिर्फ चोट की वजह से या किसी गंभीर परिस्थिति में- जैसे कि जब उनके पिता का निधन हुआ था।

सचिन को आखिरी दो एकदिवसीय मैचों में “नए खिलाड़ियों को मौका देने” के नाम पर टीम से बाहर रखा गया था। शुरू के तीन मैचों में सचिन खराब अंपायरिंग का निशाना बने थे। कुल मिला कर सचिन के लिए यह श्रृंखला खेलने जाना- न जाना बराबर ही रहा।

फिर धोनी ने कहा, सचिन को वे आराम देना चाहते थे। यह बात तो सभी क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि “ज्यादा क्रिकेट खेलने से थकान” किसको होती है। कम से कम सचिन ने तो आज तक कभी नहीं कहा कि वे क्रिकेट खेलने से कभी थके हों।

लगता तो यही है कि धोनी अब टीम के आखिरी वरिष्ठ खिलाड़ी से छुटकारा पाने की फिराक में हैं और इसके लिए वे किसी भी बहाने की शरण लेने में नहीं चूक रहे।

जब उनके अपने मित्रों को टीम में जबरदस्ती लादने की बात आती है तो धोनी तलवार ले कर खड़े हो जाते हैं। युवराज सिंह फॉर्म में नहीं थे लेकिन उन्हें टीम में हर बार लिया जाता था और पत्रकारों द्वारा इस पर सवाल उठाए जाने पर धोनी ने सार्वजनिक रूप से भन्ना कर कहा था, मैं जब तक चाहूंगा तब तक युवराज हमेशा टीम में रहेंगे। फिर इरफान पठान के बदले फॉर्म से बाहर चल रहे आर पी सिंह को टीम में लेने की जिद में उन्होंने इस्तीफे की धमकी तक दे डाली।

लेकिन सचिन जैसे खिलाड़ी को “आराम” करवाने के नाम पर धोनी टीम से बाहर कर देते हैं।

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सचिन को टीम से बाहर क्यों रख रहे हैं धोनी?

February 8th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

भारतीय क्रिकेट के सफलतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को श्रीलंका में खेलने क्यों नहीं दिया जा रहा है? क्या कप्तान धोनी टीम में बचे इस एकमात्र वरिष्ठ खिलाड़ी की उपस्थिति बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं?

श्रीलंका के साथ पहले तीन एकदिवसीय मैचों में सचिन खराब अंपायरिंग के शिकार हुए और अंपायरों के सरासर पक्षपाती निर्णयों के कारण तीनों पारियों में दस रन के अंदर ही आउट होते गए। उसके बाद चौथे और पांचवे मैचों में उन्हें कप्तान धोनी ने यह कह कर टीम से बाहर कर दिया कि वे नए खिलाड़ियों को मौका देना चाह्ते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि “नए खिलाड़ियों को मौका” देने के नाम पर पुराने बल्लेबाजों में से सिर्फ सचिन को टीम से निकाला गया है, धोनी खुद, उनके मित्र युवराज सिंह, सेहवाग, गंभीर- हर कोई टीम में है।

धोनी खुद को बल्लेबाजी क्रम में प्रोन्नत कर लेते हैं और सुरेश रैना और रोहित शर्मा जैसे बल्लेबाजों को बल्लेबाजे क्र्म में खुद से नीचे कर देते हैं।

धोनी के ईर्ष्यालु और छोटेपन का कोई सबूत बाकी रह गया हो तो सचिन को टीम से बाहर बैठा कर उन्होंने अपने ओछेपन का आसमान छूता सबूत दे दिया है।

धोनी के “नीच” स्वभाव का यह पहलू तब तक छिपा रहेगा जब तक टीम जीत रही है, लेकिन धोनी नाम का यह शख्स भारतीय टीम के लिए उतना ही विनाशकारी बन रहा है जितना कभी ग्रेग चैपल थे।

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धोनी साहब “बिज़ी” हैं

January 12th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

खबरों के मुताबिक भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी इतने “बिज़ी” हैं कि घरेलू क्रिकेट खेलना तो दूर, क्षेत्रीय टीम के चयनकर्ताओं से बात तक करने के लिए वे उपलब्ध नहीं हैं।

पूरी खबर यहां पढ़िए
इस खबर के अनुसार, आगामी दिलीप ट्रॉफी के लिए पूर्व क्षेत्र की कप्तानी धोनी की जगह उड़ीसा के शिवसुंदर दास को सिर्फ इसलिए देनी पड़ी क्योंकि घरेलू टीम के चयनकर्ताओं की लाख कोशिश के बावजूद धोनी से उनका संपर्क नहीं हो पाया।

हां भई, अब धोनी रेलवे के टीसी थोड़े ही हैं जो क्षेत्रीय चयनकर्ताओं का फोन आए तो सिर के बल खड़े हो जाएं। अब तो वे राष्ट्रीय टीम के ऎसे कप्तान हैं जिसने “सीनियर खिलाड़ियों” की टीम से छुट्टी कर दी।

जय हो धोनी महाराज की।

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धोनी बने मोहाली टेस्ट में कप्तान

October 17th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैच खबरें

बीसीसीआई (और धोनी) के मन की मुराद पूरी हुई, कुम्बले को लगी चोट, वे हुए टेस्ट टीम से बाहर और धोनी बन गए मोहाली टेस्ट के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान।

आज से मोहाली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टेस्ट शुरू हुआ है। भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी संभाली है। मैच शुरू होने के पहले खबरें थीं कि मोहाली की पिच तेज गेंदबाजों की मदद करेगी। लेकिन भारतीय पारी की शुरूआत देख कर तो ऎसा नहीं लगता। गंभीर और सेहवाग ने आरंभिक ओवरों में 6 के औसत से रन बनाए हैं।

अगर इस गति से रन बनेंगे तो टेस्ट का कुछ न कुछ नतीजा निकलने की आशा रखी जा सकती है।

हम तो यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि मोहाली टेस्ट में “भारत के कप्तान” कितने रन बनाते हैं:) पहले टेस्ट में तो धोनी ने 9 रन बनाए थे। उससे भी ज्यादा दिलचस्प था उनके आउट होने का तरीका- बिना पैर हिलाए, अपनी जगह पर खड़े- खड़े शॉट खेलने की कोशिश की थी और बोल्ड हो गए थे।

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वेंगसरकर भड़के गांगुली पर

October 10th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारत और ऑस्ट्रेलिया की श्रृंखला हो , और लड़ाई-झगड़े तथा विवाद न हो, यह तो हो ही नहीं सकता। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार विवाद ऑस्ट्रेलिया के साथ नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट के अंदर ही हो रहा है।

पहले दादा गांगुली ने चयनकर्ताओं पर आरोप लगाया कि वे उनके साथ अन्याय करते रहे, इसलिए दादा को संन्यास लेना पड़ा। अब चयनसमिति के पूर्व अध्यक्ष वेंगसरकर ने तिलमिलाकर बयान दिया है कि वे सौरव की बातों का जवाब जरूर देंगे, बस जरा श्रृंखला खत्म हो जाए।

बौखलाए हुए वेंगसरकर ने यह भी कहा कि बीसीसीआई को इस तरह की बयानबाजी (सौरव की) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

गुस्साए वेंगसरकर ने कहा कि न सिर्फ सौरव की बातों का वे जवाब देंगे, बल्कि सौरव ने जितना कहा है, उससे ज्यादा ही जवाब देंगे।

अभी तो श्रृंखला शुरू हुए दो ही दिन हुए हैं, अभी से इतना झगड़ा बढ़ गया है तो श्रृंखला खत्म होने तक भगवान जाने क्या होगा।

और हां, बयानबाजी में सबसे आगे रहने वाले धोनी ने अभी तक दादा के “हेयरस्टाइल” वाले बयान पर मुंह नहीं खोला है। ( गांगुली ने कहा था, टीम में कुछ ऎसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने जितने नहीं बनाए, उतनी बार हेयरस्टाइल बदली है)।

धोनी तो वैसे भी बड़बोलेपन में सबसे आगे हैं, अगर उन्होंने मुंह खोल दिया तो शायद इतना झगड़ा हो जाएगा कि श्रृंखला रद्द कर पोंटिंग की टीम को घर भेजना पड़ेगा कि भैया तुम जाओ, यहां शाहरुख- सलमान स्टाइल का घरेलू मैच हो रहा है।

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दादा ने धोनी, युवराज पर निशाना साधा

October 9th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

लगता है सौरव गांगुली उतनी आसानी से अपने “दुश्मनों” का पीछा नहीं छोड़ेंगे, जिताना सोचा जा रहा था। धीरे-धीरे अखबारों में गांगुली पर्दे के पीछे चल रही उन तिकड़मों का राज खोलते जा रहे हैं जो उन्हें भारतीय क्रिकेट से बाहर करने के लिए लगातार की जा रही थीं।

ताज़ा खबर यह है कि गांगुली ने एक बांग्ला अखबार को दिए इंटरव्यू में संकेत दिए हैं कि धोनी द्वारा किए जा रहे लगातार अपमान से उनके लिए टीम में खेलते रहना कितना मुश्किल होता जा रहा था। धोनी और युवराज की जोड़ी और उनके कम रन बनाने के बावजूद बीसीसीआई द्वारा सिर चढ़ाए जाने की ओर इशारा करते हुए सौरव ने व्यंग्य किया कि कई खिलाड़ी लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन निशाना सिर्फ उन्हें ही ( सौरव को) बनाया जाता रहा है।

गांगुली ने इस इंटरव्यू में धोनी और युवराज की ओर इशारा करते हुए कहा है कि टीम में कुछ खिलाड़ी ऎसे हैं जिन्होंने उतने रन नहीं बनाए जितने बार “हेयरस्टाइल” बदली है, कुछ ऎसे खिलाड़ी हैं जो लगातार कई सीरीज में खराब खेलते आए हैं, फिर भी टीम में बने रहते हैं, फिर भी उन पर कोई निशाना नहीं साधता।

लगे रहो दादा, बोर्ड की शह पर भारतीय टीम पर जिन टुच्चों का राज चल रहा है उसकी पोल खोलने की हिम्मत सिर्फ आपमें हैं।

बाल रंगने, कटाने और फिल्मी हीरोइनों के साथ चर्चा में रहने से गुब्बारे की तरह फूले घूमने और क्रिकेट खेलने के नाम पर थक जाने वाले इन तिकड़मी खिलाड़ियों की औकात नहीं भारतीय कप्तान की उस गद्दी पर बैठने की जिसे कभी टाइगर पटौदी, कपिल देव, सौरव गांगुली और अनिल कुम्बले जैसे स्वाभिमानी कप्तानों ने संभाला और जिस पर बैठ कर देश का नाम रोशन किया था।

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सौरव गांगुली ने संन्यास लेने की घोषणा की

October 7th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

भारतीय क्रिकेट के एक और बेहतरीन कप्तान और खिलाड़ी को बीसीसीआई के दबाव के आगे झुकना पड़ा।

पिछले साल के “सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर” चुने जाने वाले सौरव गांगुली ने लगातार टीम से बाहर रखे के दबाव के आगे आखिर आज क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर ही दी।

सौरव ने बेंगलुरू की एक पत्रकार वार्ता में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 9 अक्टूबर से आरंभ हो रही टेस्ट श्रृंखला उनके करियर की आखिरी श्रृंखला होगी, इसके बाद वे क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

धोनी के कलेजे को बड़ी ठंडक मिली होगी। सचिन कप्तान बनना नहीं चाहते, कुम्बले और द्रविड को अब टीम से निकालना बोर्ड के लिए जरा भी मुश्किल नहीं होगा।

बधाई धोनी, अब तुम्हारे लिए मैदान खाली है।

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क्रिकेट: कुछ महत्वपूर्ण बातें

September 29th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

1.एक अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला खेलने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का चयन होगा। सौरव गांगुली टीम में होंगे या नहीं? जानने के लिए दिल थाम कर बैठिए। ताज़ा खबर तो यह है कि बैंगलोर में भारतीय खिलाड़ियों का अध्यास शिविर गांगुली के बिना ही आज शुरू हुआ, लेकिन उसमें मोहम्मद कैफ ज़रूर शामिल थे जिन्हें ईरानी ट्रॉफी में भी गांगुली की जगह लिया गया था।

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2.दो –पांच अक्टूबर तक बोर्ड प्रेसीडेंट इलेवन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच होगा। बोर्ड प्रेसीडेंट टीम की कप्तानी युवराज सिंह करेंगे। उनका फार्म नजर रखने लायक होगा।

3.सचिन तेंडुलकर आधिकारिक तौर पर “फिट” घोषित हो गए हैं, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में खेलेंगे।

4.ईरानी टॉफी मैच में धोनी से ज्यादा रन द्रविड ने बनाए। द्रविड ने दोनों पारियों में कुल 115 रन (46 और 69 रन) बनाए जबकि धोनी ने दो पारियों में कुल 89 रन ( 5 और 84 रन) बनाए। थकेला कौन?

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