Home     Wordpress     Codex

Posts Tagged ‘धोनी’

आपकी क्या राय है?

September 25th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

Current Mood:Esctatic emoticon Esctatic

n

जोड़िएbookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark

Share This Post

Tags: ,

ईरानी ट्रॉफी : धोनी 5 रन पर आउट

September 24th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैच खबरें

भारतीय टेस्ट टीम के “भावी कप्तान” धोनी, आज ईरानी ट्रॉफी में दिल्ली के खिलाफ सिर्फ 5 रन बना कर आउट हो गए।
धोनी ने 17 गेंद खेल कर ये 5 रन बनाए।

दिल्ली और शेष भारत के बीच ईरानी ट्रॉफी के इस मैच को ऑस्ट्रेलिया के साथ आगामी टेस्ट श्रृंखला में चयन के पैमाने के रूप में देखा जा रहा था।

पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को इस मैच से इसीलिए चयनकर्ताओं ने बाहर कर दिया था।

सचिन पहले इस मैच में खेलने वाले थे, लेकिन चोट से नहीं उबर पाने के कारण उनकी जगह एस. बद्रीनाथ को टीम में जगह दी गई। उन्होंने भी खेलने से पहले बड़े- बड़े इंटरव्यू दिए और आज 62 गेंदों पर 12 रन बना कर आउट हो गए।

आज मैच की शुरूआत में शेष भारत के कप्तान अनिल कुम्बले ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था।
लेकिन उनके बल्लेबाजों में से वसीम जाफर (50) और राहुल द्रविड (46) के अलावा कोई भी टिक कर नहीं खेल पाया।

ये पंक्तियां लिखने तक शेष भारत ने 7 विकेट पर 186 रन बनाए थे। मोहम्मद कैफ भी 29 रन बना कर आउट हो गए।

जोड़िएbookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark

Share This Post

Tags: , , , ,

“ओटी” तब और अब

September 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अनिल कुम्बले की उम्र अब ढल रही है और धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दी जानी चाहिए।

उम्र का बहाना बना कर विद्रोही खिलाड़ियों से छुटकारा पाना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए नई बात नहीं है।

1983 का विश्व कप: तब भी टीम में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थे जो क्रिकेट बोर्ड की आंखों का कांटा थे और अच्छा खेलने के बावजूद उन्हें येन-केन प्रकारेण टीम से निकालने की कोशिश जारी थी।

ऎसे खिलाड़ियों में पहला नम्बर था मोहिन्दर अमरनाथ का। तब भी क्रिकेट चयनकर्ता यह कहते फिरते थे कि “ओवर 30” खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता ढल जाती है और उन्हे संन्यास ले लेना चाहिए।

’83 के विश्व कप के समय मोहिन्दर 33 वर्ष के थे और उन पर “उम्र ज्यादा हो जाने के कारण” टीम से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा था।
मोहिन्दर ने इस कोशिश का जवाब अपने चमत्कारी प्रदर्शन से दिया और विश्वकप सेमीफाइनल और फाइनल में “मैन ऑफ द मैच” जीत कर चयनकर्ताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

सुनील गावस्कर ने बाद में अपने संस्मरण में लिखा था कि उस विश्वकप के दौरान जब भी कोई वरिष्ठ खिलाड़ी अच्छा कैच लेता या बॉलिंग करता तो बाकी खिलाड़ी “ओटी- ओटी” ( ओवर थर्टी) चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाया करते थे।

संयोगवश, मोहिन्दर अमरनाथ से बोर्ड इसलिए खफा रहता था क्योंकि मोहिन्दर ने एक बार चयनकर्ताओं को “ बंच ऑफ जोकर्स” ( जोकरों क झुंड) कह दिया था। उसकी कीमत मोहिन्दर अब तक चुका रहे हैं।

लेकिन यह बात बोर्ड ने आसानी से भुला दी कि वास्तव में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” सबसे पहले किस खिलाड़ी ने कहा था. क्योंकि उस खिलाड़ी की लोकप्रियता, महान खेल और उसके प्रदेश की क्रिकेट- ताकत के कारण बोर्ड उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

वह खिलाड़ी था सुनील गावस्कर। 1980 के दशक में उन्होंने चयनकर्ताओं पर यह टिप्पणी की थी जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय रही लेकिन बोर्ड ने उसे अनदेखा कर दिया।

लेकिन वही टिप्पणी जब मोहिन्दर अमरनाथ ने की तो उन्हें भारतीय क्रिकेट से सदा के लिए अछूत बना दिया गया।

जोड़िएbookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark

Share This Post

Tags: , , , , , , , , , , , , ,

धोनी राष्ट्रीय खेल रत्न पुरस्कार लेने नहीं जाएंगे

August 28th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

कल राजधानी दिल्ली में “राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार” दिया जाना है।

कल ही श्रीलंका में भारत को वर्तमान श्रृंखला का पांचवा और अंतिम एकदिवसीय मैच खेलना है। भारतीय एकदिवसीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को खेल रत्न पुरस्कार मिला है, लेकिन धोनी श्रीलंका में श्रृंखला खेल रहे हैं इसलिए वे यह पुरस्कार ग्रहण करने नहीं जाएंगे। धोनी की तरफ से उनके पिता जी यह पुरस्कार ग्रहण करेंगे।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि सचिन तेंडुलकर को कोई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले और वे उसे ग्रहण करने सिर्फ इसलिए नहीं पहुंचे कि वे मैच खेलने वाले हैं?

श्रीलंका भारत से इतना दूर भी नहीं कि फ्लाइट लेकर धोनी भारत नहीं आ सकते। क्रिकेट श्रृंखला भी भारत ने जीत ही ली है, पांचवा मैच सिर्फ औपचारिकता है।

फिर भी धोनी को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए इतना सम्मान नहीं कि वे उसे लेने के लिए यह मैच छोड़ कर आएं। शायद धोनी को यह पसंद नहीं कि उनकी जगह कोई और, एक भी मैच में कप्तान बने। भले ही वह महत्वहीन मैच क्यों न हो।

कहते हैं न, दान भी दो तो सुपात्र को देना चाहिए, ऎसे व्यक्ति को कतई दान नहीं देना चाहिए जिसे उसकी कदर न हो।

अगर धोनी को अपनी राष्ट्रीयता पर गर्व नहीं तो उनसे राष्ट्रीय पुरस्कार वापस ले लेना चाहिए।

जोड़िएbookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark bookmark

Share This Post

Tags: , , ,

p-6fQscE0emHk9A.