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Posts Tagged ‘भारत’

लक्ष्मीपति बालाजी की वापसी

February 3rd, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

उस शोएब अख्तर सदमे में बैठे रहे। खाना खाने गए साथियों के साथ तो भी उनके मुंह से बोल नहीं फूट रहा था। खेल के मैदान पर इतनी बड़ी बेइज्जती उनकी पहले कभी नहीं हुई थी.. एक नौसिखिया, दसवें नम्बर पर खेलने आए बल्लेबाज ने उनकी गेंद पर छक्का मार दिया? ये कैसे हुआ.. महान शोएब अख्तर की गेंद पर छक्का मार दिया!

बात है 2004 की, जब सौरव गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में एकदिवसीय श्रृंखला खेल रही थी। टीम के पाकिस्तान रवाना होने के पूर्व भारत के दो नए और युवा तेज गेंदबाज चर्चा का विषय बने हुए थे। इरफान पठान और लकक्ष्मीपति बालाजी। तब पाकिस्तानी टीम के कोच जावेद मियांदाद ने अपना मशहूर बयान दिया था- “ऎसे इरफान पठान तो हमारे यहां गली- गली में होते हैं।“ और उसके बाद पठान ने पाकिस्तानी बल्लेबाजों की ऎसी हवा बिगाड़ी थी कि मियांदाद मुंह छिपाए घूमते थे। भारत ने वह श्रृंखला 3-2 से जीती थी।

उसी श्रृंखला में लाहौर में खेले गए आखिरी एकदिवसीय मैच में बालाजी ने शोएब अख्तर की गेंद को उठा कर मारा और छक्के के लिए सीमारेखा से बाहर भेज दिया था। तब तक शोएब अख्तर की गेंदों का ऎसा हौव्वा बना हुआ था जैसे कि भारत के बड़े बल्लेबाज भी उन्हें खेलना मुश्किल पाते थे। उसे शोएब की तेज गेंद पर, आखिरी बल्लेबाज के रूप में खेलने आए बालाजी जब छक्का मारा तो पूरा स्टेडियम स्तब्ध रह गया था। शोएब तो अगले दिन तक सदमे में थे।

बालाजी के उस “महान शॉट” पर तमिल में एक गीत भी रचा गया :

देखिए बालाजी के उस जबरदस्त छक्के का वीडियो यहां:

दिलचस्प बात यह है कि अपने हमेशा बिखरती शर्मीली मुस्कान और लंबे बालों के कारण बालाजी उस श्रृंखला में पाकिस्तानी लड़कियों के बीच बड़ॆ लोकप्रिय हो गए थे।

लेकिन उसके बाद चोट लगने के कारण 2005 में बालाजी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हो गए।

अब, श्रीलंका में खेली जा रही एकदिवसीय श्रृंखला में उन्हें घायल मुनाफ पटेल की जगह फिर टीम में स्थान मिला है। संयोग की बात है कि 2005 में श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए ही चोट लगने के कारण बालाजी टीम से बाहर हुए थे।

देखें, आज कोलम्बो में श्रीलंका के खिलाफ होने वाले तीसरे एकदिवसीय मैच में बालाजी खेलने उतरते हैं क्या।

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धोनी बने मोहाली टेस्ट में कप्तान

October 17th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैच खबरें

बीसीसीआई (और धोनी) के मन की मुराद पूरी हुई, कुम्बले को लगी चोट, वे हुए टेस्ट टीम से बाहर और धोनी बन गए मोहाली टेस्ट के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान।

आज से मोहाली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टेस्ट शुरू हुआ है। भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी संभाली है। मैच शुरू होने के पहले खबरें थीं कि मोहाली की पिच तेज गेंदबाजों की मदद करेगी। लेकिन भारतीय पारी की शुरूआत देख कर तो ऎसा नहीं लगता। गंभीर और सेहवाग ने आरंभिक ओवरों में 6 के औसत से रन बनाए हैं।

अगर इस गति से रन बनेंगे तो टेस्ट का कुछ न कुछ नतीजा निकलने की आशा रखी जा सकती है।

हम तो यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि मोहाली टेस्ट में “भारत के कप्तान” कितने रन बनाते हैं:) पहले टेस्ट में तो धोनी ने 9 रन बनाए थे। उससे भी ज्यादा दिलचस्प था उनके आउट होने का तरीका- बिना पैर हिलाए, अपनी जगह पर खड़े- खड़े शॉट खेलने की कोशिश की थी और बोल्ड हो गए थे।

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बेंगलुरू टेस्ट: ऑस्ट्रेलिया के 430 रन

October 10th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैच खबरें

बेंगलुरू में भारत- ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्तमान श्रृंखला के पहले टेस्ट में, ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में कुल 430 रन बनाए हैं।

अब बारी है भारतीय बल्लेबाजों की।

देखना दिलचस्प होगा कि इतने बड़े स्कोर के सामने, भारतीय क्रिकेट के एक बेहद तनावयुक्त दौर से गुजर रहे भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी किस तरह का खेल दिखाते हैं

भारतीय टीम की ओर से बल्लेबाजी की शुरूआत गौतम गंभीर और विरेन्दर सेहवाग करेंगे।

दिल थाम कर बैठिए और देखिए होता है क्या।

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“ओटी” तब और अब

September 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अनिल कुम्बले की उम्र अब ढल रही है और धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दी जानी चाहिए।

उम्र का बहाना बना कर विद्रोही खिलाड़ियों से छुटकारा पाना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए नई बात नहीं है।

1983 का विश्व कप: तब भी टीम में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थे जो क्रिकेट बोर्ड की आंखों का कांटा थे और अच्छा खेलने के बावजूद उन्हें येन-केन प्रकारेण टीम से निकालने की कोशिश जारी थी।

ऎसे खिलाड़ियों में पहला नम्बर था मोहिन्दर अमरनाथ का। तब भी क्रिकेट चयनकर्ता यह कहते फिरते थे कि “ओवर 30” खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता ढल जाती है और उन्हे संन्यास ले लेना चाहिए।

’83 के विश्व कप के समय मोहिन्दर 33 वर्ष के थे और उन पर “उम्र ज्यादा हो जाने के कारण” टीम से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा था।
मोहिन्दर ने इस कोशिश का जवाब अपने चमत्कारी प्रदर्शन से दिया और विश्वकप सेमीफाइनल और फाइनल में “मैन ऑफ द मैच” जीत कर चयनकर्ताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

सुनील गावस्कर ने बाद में अपने संस्मरण में लिखा था कि उस विश्वकप के दौरान जब भी कोई वरिष्ठ खिलाड़ी अच्छा कैच लेता या बॉलिंग करता तो बाकी खिलाड़ी “ओटी- ओटी” ( ओवर थर्टी) चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाया करते थे।

संयोगवश, मोहिन्दर अमरनाथ से बोर्ड इसलिए खफा रहता था क्योंकि मोहिन्दर ने एक बार चयनकर्ताओं को “ बंच ऑफ जोकर्स” ( जोकरों क झुंड) कह दिया था। उसकी कीमत मोहिन्दर अब तक चुका रहे हैं।

लेकिन यह बात बोर्ड ने आसानी से भुला दी कि वास्तव में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” सबसे पहले किस खिलाड़ी ने कहा था. क्योंकि उस खिलाड़ी की लोकप्रियता, महान खेल और उसके प्रदेश की क्रिकेट- ताकत के कारण बोर्ड उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

वह खिलाड़ी था सुनील गावस्कर। 1980 के दशक में उन्होंने चयनकर्ताओं पर यह टिप्पणी की थी जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय रही लेकिन बोर्ड ने उसे अनदेखा कर दिया।

लेकिन वही टिप्पणी जब मोहिन्दर अमरनाथ ने की तो उन्हें भारतीय क्रिकेट से सदा के लिए अछूत बना दिया गया।

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