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Posts Tagged ‘सौरव गांगुली’

सौरव गांगुली: क्रिकेट का चाणक्य

April 2nd, 2010 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

कल, गुरुवार रात आईपीएल-3 का 30वां मैच कोलकाता नाइट राइडर्स और डेक्कन चार्जर्स के बीच खेला गया। आंकड़े बताते हैं कि मैच कोलकाता की टीम ने जीता और उसके कप्तान सौरव गांगुली ने 88 रनों की शानदार पारी की बदौलत “मैन ऑफ द मैच” का खिताब भी जीता।

जो बात आंकड़े कभी बयान नहीं कर पाएंगे, और जो बात यह मैच टीवी पर, मैदान में या सिनेमाघर के बड़े पर्दे पर देख रहे दर्शकों ने महसूस की, और जो बात टीवी पर कमंटरी कर रहे पूर्व महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर और रॉबिन जैकमैन लगातार कह रहे थे, वह थी- सौरव गांगुली की अद्भुत कप्तानी।

आईपीएल-2 में गांगुली से कप्तानी छीन कर ब्रैण्डन मैक्क्लम को सौंपी गई कप्तानी, तानाशाह कोच जॉन बुकानन के ऊट-पटांग फॉर्मूले और टीम के मालिक शाहरुख खान का उन पर अंधविश्वास- इन सब ने मिल कर न सिर्फ कोलकाता की टीम को सबसे पिछड़ी टीम बना दिया, उसके खिलाड़ियों की एकता तार-तार कर दी और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम सबके उपहास का पात्र बन गई। कोलकाता की टीम मैदान पर उतरती तो उसके बल्लेबाजों की असफलता, गेंदबाजों की पिटाई और क्षेत्ररक्षकों के अनाड़ीपन पर दर्शक ठहाके लगाने लगते।

टूर्नामेंट खत्म हुआ, कोलकाता की टीम सबसे निचले पायदान पर थी और उसके खिल्ली सारी दुनिया में उड़ रही थी। तब जा कर शाहरुख खान को होश आया। उस चिंदी- चिंदी हुई टीम की कप्तानी उन्होंने फिर सौरव गांगुली को सौंपी जो इस सारे ड्रामे और अपमान से बेहद मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।

यानी मामला ऎसा था कि लो, मैंने तो खिचड़ी जला दी, अब तुम इसे सुधारो और स्वादिष्ट पुलाव बना कर दिखाओ।

यह असंभव काम भी सौरव गांगुली ने अपनी उसी अद्भुत कप्तानी से कर दिखाया जिसके बल पर वे भारतीय क्रिकेट टीम को विजय दिलाते रहे हैं।

अब तक आईपीएल-3 के खेले गए मैचों में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम पांचवे स्थान पर है और सेमीफाइनल में पहुंचने के लक्ष्य पर आंखे लगाए है। डेक्कन चार्जर्स पिछले आईपीएल के विजेता हैं और इस बार उन्हें कोलकाता की टीम दो मुकाबलों में हरा चुकी है। कोलकाता की टीम मैदान में एक-दूसरे की पीठ थपथपाती और हंसती- मुस्कराती नजर आ रही है।

टीम का यह कायाकल्प करने में सौरव गांगुली को जितने मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा उसकी शायद और कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। न सिर्फ उनकी टीम के प्रतिष्ठा दांव पर थी, बल्कि उनकी अपनी बल्लेबाजी की भी कठोर आलोचना की जा रही थी। इससे पहले के मैच में जब सौरव मैदान पर उतरे थे तो उनकी आंखों के नीचे काले घेरे नजर आ रहे थे और उनकी चाल-ढाल से उनका तनाव साफ झलक रहा था। जगजाहिर था कि अगर इस बार सौरव असफल हुए तो क्रिकेट का यह एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय मंच भी उनसे छिन जाएगा।

कल के मैच के दौरान भी, आरंभिक ओवरों में टीवी स्क्रीन पर लगातार ये आंकड़े दिखाए जा रहे थे कि कैसे बल्लेबाजी में सौरव आईपीएल के “बदतरीन” बल्लेबाज रहे हैं।

जैसे –जैसे सौरव के छक्के ईडन गार्डेंस की छतों पर गिरने लगे, वैसे –वैसे ये आंकड़े भी स्क्रीन से गायब होने लगे।

जब डेक्कन चार्जर्स की बल्लेबाजी की पारी आई तब सौरव गांगुली ने बतौर कप्तान ऎसी- ऎसी तिकड़में लगाईं, अपनी टीम के नवोदित और वरिष्ठ खिलाडियों को इस तरह एकजुट कर उनसे बेहतरीन प्रदर्शन करवाया कि डेक्कन चार्जर्स का सायमण्ड्स जैस धाकड़ बल्लेबाज भी रन नहीं बना पाया और सुनील गावस्कर और रॉबिन जैकमैन जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी सौरव की कप्तानी पर वाह- वाह कर उठे।

ईडन गार्ड्ंस की पिच कैसा खेलेगी, हवा का रुख किस तरफ है और उसके मुताबिक किस गेंदबाज को किस छोर से गेंदबाजी कराई जाए, कब गेंदबाजी में कैसा परिवर्तन किया जाए, किस प्रतिद्वंदी बल्लेबाज की क्या कमजोरी है, किस प्रतिद्वंदी गेंदबाज की क्या कमजोरी है- सौरव गांगुली मैच में हर क्षण इन्हीं रणनीतियों में व्यस्त रहे और उनका एक भी दांव गलत नहीं हुआ।

यह एक ऎसा मैच था जिसमें सौरव गांगुली ने दिखाया कि क्रिकेट सिर्फ भुजाओं की ताकत से नहीं जीता जाता, बल्कि विजेता वही होता है जो दिमागी खेल से मैदान में प्रतिद्वंदी को शिकस्त दे।

क्रिकेट के चाणक्य की उपाधि दी जा सकती है सौरव गांगुली को।

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आईपीएल: शाहरुख की बॉलीवुडिया मानसिकता

April 19th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

बॉलीवुड में तब तक दुनिया आपकी दोस्त होती है जब तक शुक्रवार को आपकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चलती है। जिस शुक्रवार को आपकी फिल्म पिटी, उस शुक्रवार की शाम तक आप अगली कई फिल्मों से बाहर हो जाते हैं, आपके “जानी दोस्त” आपका फोन नहीं उठाते और पार्टियों में आपसे आंखें चुराने लगते हैं। कुल जमा मतलब यह, कि मतलब की इस फिल्मी दुनिया में सिर्फ चढ़ते सूरज से दोस्ती निभाई जाती है। सितारा जरा गर्दिश में आया नहीं कि लोगों की आंखें बदल जाती हैं।

शाहरुख खान यही फिल्मी मानसिकता आईपीएल की अपनी टीम “कोलकाता नाइट राइडर्स” के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ दिखा रहे हैं। 2007- 2008 में गांगुली का चमकदार दौर चल रहा था। सो शाहरुख ने उनका फायदा उठाया, खूब मीठी- मीठी बातें कीं, उन्हें अपनी टीम का कप्तान बनाया और हर मामले में सलाह- मशविरे के लिए गांगुली को आमंत्रित किया। फिर पिछले साल क्रिकेट की राजनीति के कारण सौरव गांगुली को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेना पड़ा।

और उसके साथ ही शाहरुख की भी नजरें बदल गईं। ऎसी बदलीं कि अपनी टीम का कप्तान बदल दिया और गांगुली को इसकी जानकारी तक देना जरूरी नहीं समझा।

जिस क्रिकेट कप्तान के अनुभव से फायदा उठा कर एक से एक बढ़िया खिलाड़ियों की टीम बना पाए शाहरुख, उसी को बेइज्जत कर कप्तानी से हटा दिया। यही नहीं, बातें यहां तक हो रही हैं कि शाहरुख अब गांगुली को टीम से भी हटाना चाहते हैं। “मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं”—बॉलीवुड की किसी फिल्म का यह गाना शाहरुख खान पर खूब खरा उतरता है।

लेकिन शाहरुख खान यह भूल गए हैं कि भारतीय जनता, फिल्म इंडस्ट्री के उसूलों पर नहीं चलती है। भारत के क्रिकेट प्रेमियों के लिए पैसा नहीं उनके प्यारे खिलाड़ी भगवान होते हैं। और अपने आदर्श खिलाड़ियों का अपमान वे चुप रह कर देख सकते हैं, लेकिन अपमान करने वाले को कभी माफ नहीं कर सकते।

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सचिन- सौरव: पुरानी शराब, बेहतरीन नशा!!

October 18th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

मोहाली टेस्ट के पहले और दूसरे दिन जो स्टेडियम में खेल देखने के लिए मौजूद थे, वे क्रिकेट की दुनिया में सबसे भाग्यशाली लोगों में से थे। भारतीय क्रिकेट के दो अभूतपूर्व बल्लेबाज, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली अपनी जिंदगी भर की प्रतिष्ठा बचाने के लिए मैदान पर उतरे थे। और न सिर्फ दोनों ने अपनी प्रतिष्ठा बचाई, बल्कि उसमें चार चांद और लगा दिए।

बात सिर्फ रन या रेकॉर्ड बनाने की नहीं है। बात है उस दबाव, अपमान और तनाव की आग में तप कर सोने की तरह खरा उतरने की है जिसमें सचिन और सौरव पिछले करीब एक साल से जलाए जा रहे थे।

न सिर्फ बीसीसीआई और नए खिलाड़ियों द्वारा अपमानित किए गए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया जिस तरह सीनियर खिलाड़ियों के पीछे पड़ा हुआ था उसे झेल पाना किसी फौलादी जिगर वाले के लिए भी कम नहीं था।

यह अपमान इतना अधिक बढ़ गया था कि सौरव ने संन्यास लेने की घोषणा कर दी, कुम्बले ने अखबार के अपने कॉलम में लिखा कि मीडिया में अपनी आलोचना देख कर उन्हें लगता है जैसे वे ऑस्ट्रेलिया में आ गए हैं। यही नहीं, अक्सर चुप रह जाने वाले सचिन तेंदुलकर तक इस बार खामोश नहीं रह पाए और लारा का रेकॉर्ड तोड़ने के बाद पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने भी कहा कि “मुझसे यह बोलने का हक किसी को नहीं हैं कि अब तुम खेलना बंद कर दो।”

रेकॉर्ड पुस्तिकाओं में लिखा जाएगा कि सचिन ने इस मैच की पहली पारी में 88 रन बनाए, उस दौरान टेस्ट मैचों में सर्वाधिक रन बनाने का ब्रायन लारा का रेकॉर्ड तोड़ा, टेस्ट मैचों में 12,000 रनों की संख्या पार की- लेकिन उनमें सचिन की इस पारे के दौरान मारे गए शॉट्स की खूबसूरती दर्ज नहीं हो पाएगी, स्टेडियम में बैठे और टीवी पर सचिन की पारी का एक- एक रन गिनते, दिल थाम कर बैठे लाखों लोगों की खुशी का बयान नहीं लिखा जा सकेगा जो सचिन द्वारा लारा का रेकॉर्ड तोड़ने वाला रन बनाते ही ऎसे खुशी से उछल पड़े थे जैसे उनके ही किसी करीबी ने वह रेकॉर्ड बनाया हो।

रेकॉर्ड पुस्तिकाएं यह भी बताएंगी कि मैच के दूसरे दिन सौरव गांगुली ने भी अपना शतक पूरा किया, लेकिन उनमें यह कहां से लिखा जा सकेगा कि शतक पूरा करते ही गांगुली के चेहरे पर जो मुस्कान फैली थी वह बेशकीमती हीरों में भी नहीं तौली जा सकती, कि उनके 100 वां रन लेते ही टीवी के सामने बैठे दर्शक भी कैसे गांगुली के सम्मान में ताली बजा उठे थे।

और हां, उससे पहले जब गांगुली ने अपना अर्धशतक पूरा किया था तब हवा में उनका मुक्का लहराना और जवाब में ड्रेसिंग रूम से हरभजन का पहलवानों की तरह बांहों की मांसपेशियां फुला कर दिखाना भी तो इन रेकॉर्ड पुस्तिकाओं में दर्ज नहीं हो पाएगा।

वह तो दर्ज है उन लाखों दर्शकों के दिलों में जो सचिन और सौरव के अपमान से तिलमिलाए बैठे है और रास्ता देख रहे थे कि देश को गौरव की नयी ऊंचाइयां दिलाने वाले इन खिलाड़ियों का बल्ला कब बोलेगा।

मोहाली में दोनों का बल्ला बोला और क्या खूब बोला, कि बीसीसीआई से लेकर, वरिष्ठ खिलाड़ियों को “बूढ़ों की सेना” कहने वाले मीडिया के मुंह पर गोदरेज का ताला पड़ गया।

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वेंगसरकर भड़के गांगुली पर

October 10th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारत और ऑस्ट्रेलिया की श्रृंखला हो , और लड़ाई-झगड़े तथा विवाद न हो, यह तो हो ही नहीं सकता। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार विवाद ऑस्ट्रेलिया के साथ नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट के अंदर ही हो रहा है।

पहले दादा गांगुली ने चयनकर्ताओं पर आरोप लगाया कि वे उनके साथ अन्याय करते रहे, इसलिए दादा को संन्यास लेना पड़ा। अब चयनसमिति के पूर्व अध्यक्ष वेंगसरकर ने तिलमिलाकर बयान दिया है कि वे सौरव की बातों का जवाब जरूर देंगे, बस जरा श्रृंखला खत्म हो जाए।

बौखलाए हुए वेंगसरकर ने यह भी कहा कि बीसीसीआई को इस तरह की बयानबाजी (सौरव की) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

गुस्साए वेंगसरकर ने कहा कि न सिर्फ सौरव की बातों का वे जवाब देंगे, बल्कि सौरव ने जितना कहा है, उससे ज्यादा ही जवाब देंगे।

अभी तो श्रृंखला शुरू हुए दो ही दिन हुए हैं, अभी से इतना झगड़ा बढ़ गया है तो श्रृंखला खत्म होने तक भगवान जाने क्या होगा।

और हां, बयानबाजी में सबसे आगे रहने वाले धोनी ने अभी तक दादा के “हेयरस्टाइल” वाले बयान पर मुंह नहीं खोला है। ( गांगुली ने कहा था, टीम में कुछ ऎसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने जितने नहीं बनाए, उतनी बार हेयरस्टाइल बदली है)।

धोनी तो वैसे भी बड़बोलेपन में सबसे आगे हैं, अगर उन्होंने मुंह खोल दिया तो शायद इतना झगड़ा हो जाएगा कि श्रृंखला रद्द कर पोंटिंग की टीम को घर भेजना पड़ेगा कि भैया तुम जाओ, यहां शाहरुख- सलमान स्टाइल का घरेलू मैच हो रहा है।

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बेंगलुरू टेस्ट: ऑस्ट्रेलिया के 430 रन

October 10th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैच खबरें

बेंगलुरू में भारत- ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्तमान श्रृंखला के पहले टेस्ट में, ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में कुल 430 रन बनाए हैं।

अब बारी है भारतीय बल्लेबाजों की।

देखना दिलचस्प होगा कि इतने बड़े स्कोर के सामने, भारतीय क्रिकेट के एक बेहद तनावयुक्त दौर से गुजर रहे भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी किस तरह का खेल दिखाते हैं

भारतीय टीम की ओर से बल्लेबाजी की शुरूआत गौतम गंभीर और विरेन्दर सेहवाग करेंगे।

दिल थाम कर बैठिए और देखिए होता है क्या।

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दादा ने धोनी, युवराज पर निशाना साधा

October 9th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

लगता है सौरव गांगुली उतनी आसानी से अपने “दुश्मनों” का पीछा नहीं छोड़ेंगे, जिताना सोचा जा रहा था। धीरे-धीरे अखबारों में गांगुली पर्दे के पीछे चल रही उन तिकड़मों का राज खोलते जा रहे हैं जो उन्हें भारतीय क्रिकेट से बाहर करने के लिए लगातार की जा रही थीं।

ताज़ा खबर यह है कि गांगुली ने एक बांग्ला अखबार को दिए इंटरव्यू में संकेत दिए हैं कि धोनी द्वारा किए जा रहे लगातार अपमान से उनके लिए टीम में खेलते रहना कितना मुश्किल होता जा रहा था। धोनी और युवराज की जोड़ी और उनके कम रन बनाने के बावजूद बीसीसीआई द्वारा सिर चढ़ाए जाने की ओर इशारा करते हुए सौरव ने व्यंग्य किया कि कई खिलाड़ी लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन निशाना सिर्फ उन्हें ही ( सौरव को) बनाया जाता रहा है।

गांगुली ने इस इंटरव्यू में धोनी और युवराज की ओर इशारा करते हुए कहा है कि टीम में कुछ खिलाड़ी ऎसे हैं जिन्होंने उतने रन नहीं बनाए जितने बार “हेयरस्टाइल” बदली है, कुछ ऎसे खिलाड़ी हैं जो लगातार कई सीरीज में खराब खेलते आए हैं, फिर भी टीम में बने रहते हैं, फिर भी उन पर कोई निशाना नहीं साधता।

लगे रहो दादा, बोर्ड की शह पर भारतीय टीम पर जिन टुच्चों का राज चल रहा है उसकी पोल खोलने की हिम्मत सिर्फ आपमें हैं।

बाल रंगने, कटाने और फिल्मी हीरोइनों के साथ चर्चा में रहने से गुब्बारे की तरह फूले घूमने और क्रिकेट खेलने के नाम पर थक जाने वाले इन तिकड़मी खिलाड़ियों की औकात नहीं भारतीय कप्तान की उस गद्दी पर बैठने की जिसे कभी टाइगर पटौदी, कपिल देव, सौरव गांगुली और अनिल कुम्बले जैसे स्वाभिमानी कप्तानों ने संभाला और जिस पर बैठ कर देश का नाम रोशन किया था।

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गांगुली ने एक तीर से किए कई शिकार

October 8th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

तो सौरव गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के साथ वर्तमान श्रृंखला के बाद संन्यास लेने की घोषणा कर दी।

और इस एक तीर से गांगुली ने अपने कई “सिरदर्दों” का शिकार सफाई से कर लिया।

1.उनका सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ था “ईडियट बॉक्स” याने टीवी चैनलों के उतने ही जाहिल पत्रकार जो दिन रात सिर्फ इसी चर्चा में लगे हुए थे कि गांगुली को बोर्ड कैसे निकालने वाला है, कब निकालने वाला है, क्यों निकालने वाला है वगैरह।

गांगुली के टीम से निकाले जाने की घंटों चर्चा के अलावा इनके पास और कोई काम नहीं था। लेकिन जिस दिन से सौरव गांगुली ने रिटायरमेंट का ऎलान कर दिया, उस दिन से ये बुद्धू बक्से की फौज उन्हें छोड़ कर बाकी वरिष्ठ खिलाड़ियों के पीछे पड़ गई। सौरव का सिर्फ गुणगान दिखाया जाने लगा। यानी सौरव के सिर से 24 घंटे चलने वाली “ब्रेकिंग न्यूज” का सिरदर्द खत्म हो गया, तनाव खत्म।

2.क्रिकेट चयनकर्ताओं ने उन्हें सिर्फ पहले दो टेस्ट के लिए टीम में लिया था, वह भी 15 सदस्यीय दल में। यह तय भी नहीं था कि टेस्ट खेलने उतरने वाले अंतिम 11 खिलाड़ियों में सौरव को जगह मिलती।

क्रिकेट बोर्ड के आका जिस तरह सौरव को लगातार अपमानित करने पर तुले हुए थे, उसे देखते हुए आश्चर्य की बात नहीं होती अगर सौरव को टेस्ट में 12 वां खिलाड़ी ही बना दिया जाता।

इसीलिए संन्यास लेने की घोषणा करते समय सौरव ने बड़ी चतुराई से अपने शब्दों का चयन किया। उन्होंने कहा “ ये चार टेस्ट मेरे करियर के आखिरी टेस्ट होंगे।”

संन्यास लेने की घोषणा के बाद सौरव के पक्ष में जिस तरह देश- विदेश में सहानुभूति की लहर चल पड़ी है, उसे देखते हुए अब चयनकर्ताओं या बीसीसीआई के अन्य आकाओं की हिम्मत नहीं होगी कि सौरव को इन चार टेस्ट मैचों से बाहर रखें। सौरव अब चाहे रन बनाएं या न बनाएं, उन्हें इन चार मैचों में खिलाना क्रिकेट बोर्ड की मजबूरी बन गई है। यानी बोर्ड से दो की जगह चार मैच झपट लिए सौरव ने। “ दादा” के सिवा दिमागी शतरंज में बीसीसीआई को ऎसी मात भला और कौन खिलाड़ी दे सकता था?

3.इन सारे दिमागी तनावों से मुक्त होंगे, तो सौरव के सामने मौका है बढ़िया खेल दिखा पाने का। अगर सफल हो गए तो संन्यास छोड़ कर खेलना जारी रख सकते हैं। अगर नहीं हुए तो भी बोर्ड के हाथ बेइज्जती नहीं होगी और वे अपनी शान के साथ रिटायर हो सकेंगे।

4.ऑस्ट्रेलिया के सामने खेलना आसान नहीं होता, चाहे अपने देश में हो या उअंके। जिन “युवा” खिलाड़ियों के दम पर वरिष्ठ खिलाड़ियों को निकालने की बात हो रही है, उनमें से अधिकांश अब तक के अभ्यास मैचों या ईरानी ट्रॉफी मैचों में अधिक सफल नहीं रहे हैं। खुद धोनी का फॉर्म ढीला- ढाला चल रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम दिमागी खेल खेलने में माहिर है। उनके सामने सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक चतुराई भी जरूरी होती है सफलता के लिए। यह चतुराई अनुभव के कारण वरिष्ठ खिलाड़ियों में है। इस ऑस्ट्रेलियाई अग्नि परीक्षा में युवा ब्रिगेड सफल हो सकेगी, यह जरूरी नहीं। अगर उसे सफलता नहीं मिली तो वरिष्ठ खिलाड़ियों के सिर पर लटकी तलवार कुछ समय के लिए हट सकती है।

ये सारे दांव गांगुली ने अपनी संन्यास की चाल में छिपा रखे हैं। दिमागी खेल खेलने में उन्हें कितनी महारत हासिल है, यह बीसीसीआई से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जानते हैं। पूछिए रिकी पोंटिंग से जिन्हें कभी टॉस के लिए मैदान पर 20 मिनट इंतजार करवा कर भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने औकात बताई थी।

इसी दिमाग के बल पर तो सौरव ने ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान को उन्हीं की धरती पर हराया था। बीसीसीआई उनके हाथ से बल्ला छीन सकती है, उनके दिमाग की धार कुंद नहीं कर सकती।

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सौरव गांगुली ने संन्यास लेने की घोषणा की

October 7th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

भारतीय क्रिकेट के एक और बेहतरीन कप्तान और खिलाड़ी को बीसीसीआई के दबाव के आगे झुकना पड़ा।

पिछले साल के “सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर” चुने जाने वाले सौरव गांगुली ने लगातार टीम से बाहर रखे के दबाव के आगे आखिर आज क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर ही दी।

सौरव ने बेंगलुरू की एक पत्रकार वार्ता में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 9 अक्टूबर से आरंभ हो रही टेस्ट श्रृंखला उनके करियर की आखिरी श्रृंखला होगी, इसके बाद वे क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

धोनी के कलेजे को बड़ी ठंडक मिली होगी। सचिन कप्तान बनना नहीं चाहते, कुम्बले और द्रविड को अब टीम से निकालना बोर्ड के लिए जरा भी मुश्किल नहीं होगा।

बधाई धोनी, अब तुम्हारे लिए मैदान खाली है।

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सौरव गांगुली, टेस्ट टीम में स्वागत है

October 1st, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

आखिरकार सौरव गांगुली को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल कर ही लिया गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 9 अक्टूबर से आरंभ हो रही टेस्ट श्रृंखला के पहले दो टेस्ट मैचों के लिए आज भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा की गई जिसमें सौरव गांगुली का नाम भी शामिल है।

एक मुश्किल है, आज जो टीम घोषित की गई है, वह 15 खिलाड़ियों की है। इनमें से सिर्फ 11 ही मैदान पर उतरेंगे टेस्ट मैच में। क्या सौरव गांगुली उनमें से एक होंगे?

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के वर्तमान आकाओं पर हमें एक रत्ती यकीन नहीं है, इसलिए 9 तारीख तक हम यकीन नहीं करने वाले कि गांगुली को टेस्ट मैच में वाकई खेलने का मौका मिलेगा। जिस दिन अंतिम 11 खिलड़ियों की घोषणा होगी, तब तक गांगुली के प्रशंसकों को दिल थाम कर बैठना होगा।

बड़ी चर्चा हो रही है कि बोर्ड ने गांगुली से सौदा किया है कि टेस्ट टीम में तभी आओगे जब ऑस्ट्रेलिया के साथ श्रृंखला के बाद संन्यास लेने की घोषणा करोगे।

अगर कोई एक क्षण के लिए भी विश्वास करता है कि सौरव ऎसी किसी “ब्लैकमेलिंग” के आगे सिर झुकाएंगे तो शायद उसे गांगुली के खेल जीवन के बारे में ज्यादा नहीं मालूम।

जो शख्स ग्रेग चैपल जैसे कुटिल, षड्यंत्रकारी कोच और उसका समर्थन कर रही बीसीसीआई की संयुक्त ताकत के आगे नहीं झुका, उसे झुकाने की ताकत आज के क्रिकेट आका नहीं रखते।

इसीलिए, जब चयन के बाद गांगुली से टीवी पत्रकारों ने पूछा कि क्या उन्होंने बोर्ड के साथ संन्यास लेने की कोई “डील” की है तो सौरव ने थोड़ी नाराजगी से कहा कि यह सब झूठ है।

तो इंतजार कीजिए 9 अक्टूबर से शुरू होने वाले पहले मैच का।

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क्रिकेट: कुछ महत्वपूर्ण बातें

September 29th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

1.एक अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला खेलने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का चयन होगा। सौरव गांगुली टीम में होंगे या नहीं? जानने के लिए दिल थाम कर बैठिए। ताज़ा खबर तो यह है कि बैंगलोर में भारतीय खिलाड़ियों का अध्यास शिविर गांगुली के बिना ही आज शुरू हुआ, लेकिन उसमें मोहम्मद कैफ ज़रूर शामिल थे जिन्हें ईरानी ट्रॉफी में भी गांगुली की जगह लिया गया था।

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2.दो –पांच अक्टूबर तक बोर्ड प्रेसीडेंट इलेवन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच होगा। बोर्ड प्रेसीडेंट टीम की कप्तानी युवराज सिंह करेंगे। उनका फार्म नजर रखने लायक होगा।

3.सचिन तेंडुलकर आधिकारिक तौर पर “फिट” घोषित हो गए हैं, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में खेलेंगे।

4.ईरानी टॉफी मैच में धोनी से ज्यादा रन द्रविड ने बनाए। द्रविड ने दोनों पारियों में कुल 115 रन (46 और 69 रन) बनाए जबकि धोनी ने दो पारियों में कुल 89 रन ( 5 और 84 रन) बनाए। थकेला कौन?

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