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Posts Tagged ‘Anil Kumble’

“ओटी” तब और अब

September 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अनिल कुम्बले की उम्र अब ढल रही है और धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दी जानी चाहिए।

उम्र का बहाना बना कर विद्रोही खिलाड़ियों से छुटकारा पाना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए नई बात नहीं है।

1983 का विश्व कप: तब भी टीम में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थे जो क्रिकेट बोर्ड की आंखों का कांटा थे और अच्छा खेलने के बावजूद उन्हें येन-केन प्रकारेण टीम से निकालने की कोशिश जारी थी।

ऎसे खिलाड़ियों में पहला नम्बर था मोहिन्दर अमरनाथ का। तब भी क्रिकेट चयनकर्ता यह कहते फिरते थे कि “ओवर 30” खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता ढल जाती है और उन्हे संन्यास ले लेना चाहिए।

’83 के विश्व कप के समय मोहिन्दर 33 वर्ष के थे और उन पर “उम्र ज्यादा हो जाने के कारण” टीम से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा था।
मोहिन्दर ने इस कोशिश का जवाब अपने चमत्कारी प्रदर्शन से दिया और विश्वकप सेमीफाइनल और फाइनल में “मैन ऑफ द मैच” जीत कर चयनकर्ताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

सुनील गावस्कर ने बाद में अपने संस्मरण में लिखा था कि उस विश्वकप के दौरान जब भी कोई वरिष्ठ खिलाड़ी अच्छा कैच लेता या बॉलिंग करता तो बाकी खिलाड़ी “ओटी- ओटी” ( ओवर थर्टी) चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाया करते थे।

संयोगवश, मोहिन्दर अमरनाथ से बोर्ड इसलिए खफा रहता था क्योंकि मोहिन्दर ने एक बार चयनकर्ताओं को “ बंच ऑफ जोकर्स” ( जोकरों क झुंड) कह दिया था। उसकी कीमत मोहिन्दर अब तक चुका रहे हैं।

लेकिन यह बात बोर्ड ने आसानी से भुला दी कि वास्तव में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” सबसे पहले किस खिलाड़ी ने कहा था. क्योंकि उस खिलाड़ी की लोकप्रियता, महान खेल और उसके प्रदेश की क्रिकेट- ताकत के कारण बोर्ड उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

वह खिलाड़ी था सुनील गावस्कर। 1980 के दशक में उन्होंने चयनकर्ताओं पर यह टिप्पणी की थी जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय रही लेकिन बोर्ड ने उसे अनदेखा कर दिया।

लेकिन वही टिप्पणी जब मोहिन्दर अमरनाथ ने की तो उन्हें भारतीय क्रिकेट से सदा के लिए अछूत बना दिया गया।

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धोनी को टेस्ट कप्तान बनाने की तैयारी?

September 2nd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने बयान दिया है कि धोनी अब टेस्ट टीम की कप्तानी के लायक तैयार हो चुके हैं।
यानी सिंहासन खाली करो कि खेल रत्न आते हैं।

वही “खेलरत्न” जो थके होने के कारण श्रीलंका से टेस्ट श्रृंखला छोड़ कर देश लौट आए थे और यहां रिएलिटी टी वी शो, विज्ञापन की शूटिंग और बॉलीवुड के फिल्मी सितारों के साथ अपना बर्थडे मनाने में व्यस्त हो गए थे।

कर्स्टन का कहना है कि, अभी कोई जल्दी नहीं है ( धोनी की ताजपोशी की), कुम्बले अच्छा खेल रहे हैं लेकिन उनकी उम्र अब ढलान पर है।

शायद गैरी को क्रिकेट की दुनिया के बेताज बादशाह, सर डॉन ब्रैडमैन के बारे में ज्यादा पता नहीं है। वर्ना उन्हें यह भी पता होता कि सर डॉन 40 साल की उम्र तक खेल कर रिटायर हुए थे और उनके बारे में कभी किसी ने नहीं कहा कि उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए क्योंकि उनकी “उम्र ढलान पर है।”

क्या यह आश्चर्य की बात नहीं, कि दुनिया की किसी भी क्रिकेट टीम में उम्र की बात उठा कर खिलाड़ियों को रिटायर होने के लिए नहीं कहा जाता लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम में जब देखो तब “उम्र ज्यादा हो गई है, उम्र ज्यादा हो गई है” कह कर विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को टीम निकाला दिया जा रहा है।

क्या यह ऑस्ट्रेलिया में भज्जी- सायमंड्स विवाद ( दूसरा टेस्ट, सिडनी) में कुम्बले ( और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों) के बोर्ड के आगे नहीं झुकने का बदला निकाला जा रहा है? अगर आपको याद हो तो कुम्बले और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों ने तब बोर्ड की आज्ञा का उल्लंघन करते हुए, भज्जी के मामले का निपटारा होने तक कोई भी मैच खेलने से इंकार कर दिया था। यही नहीं, इन वरिष्ठ खिलाड़ियों ने बोर्ड अध्यक्ष शरद पवार के लगातार बयानों के बावजूद तीसरे टेस्ट के लिए पर्थ जाने से भी इंकार कर दिया था।

आप क्या सोचते हैं, क्रिकेट बोर्ड ने आज तक खिलाड़ियों के तेज तेवर बर्दाश्त किए हैं जो अब करेगा? धोनी के रूप में उसे एक मह्त्वाकांक्षीमोहरा मिल गया है जिसे आगे कर क्रिकेट बोर्ड वरिष्ठ खिलाड़ियों को अपनी बात ठुकराने की सजा दे रहा है।

गांगुली, द्रविड और कुम्बले को पहले ही एक दिवसीय टीम से बाहर कर दिया गया था, अब उन्हें वन डे टीम से निकालने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। बस एक सचिन को हाथ नहीं लगा पाता बोर्ड क्योंकि एक तो सचिन को पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियोंके बीच वही सम्मान प्राप्त है जो सर डॉन ब्रैडमैन को प्राप्त है। दूसरे, महाराष्ट्र की क्रिकेट लॉबी इतनी सशक्त है कि सचिन का बाल भी बांका हुआ तो क्रिकेट जगत में विद्रोह हो जाएगा।

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जान में जान आई

August 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

गाले का दूसरा टेस्ट आज जीत कर भारतीय टीम के “सीनियर” खिलाड़ियों की जान में जान आई होगी। वह भी 170 रन के अंतर से जीता जो वाकई खुशगवार बात थी।

इससे पहले कोलम्बो में खेला गया पहला टेस्ट पारी और 239 रनों से हार कर कुम्बले एंड कंपनी की नाक जड़ से कट गई थी। खास कर यह देखते हुए कि उनकी प्रतिष्ठा युवा खिलाड़ियों के मुकाबले दांव पर थी।

एक बात और, जब से ऑस्ट्रेलिया में भज्जी- सायम्ण्ड्स कांड हुआ है, या कह लीजिए जब से कुम्बले कप्तान बने हैं, तब से भारतीय टीम अपने खिलाफ किसी तरह का अन्याय बर्दाश्त करने का दब्बूपन नहीं दिखाती है। गाले टेस्ट में भी दूसरी पारी में द्रविड के खिलाफ आउट दिए जाने के गलत निर्णय को लेकर भारतीय टीम अपनी नाराजगी खुल कर दिखा रही है। और तो और, द्रविड जैसा चुप्पा खिलाड़ी भी अपनी नाराजगी का खुल कर प्रदर्शन करने से नहीं हिचकिचाया और उसने अपना बल्ला जमीन पर दे मारा।

खुशी की बात यह है कि भारतीय बोर्ड भी अपने खिलाड़ियों का साथ देता है।

वर्ना एक समय था जब बिशन सिंह बेदी ने इंगलैण्ड के तेज गेंदबाज बॉब विलिस के “वेसलीन” कांड की शिकायत की थी तो भारतीय बोर्ड ने उल्टा बेदी को ही दंडित किया था।

क्या था वह ” वेसलीन कांड”, बताएंगे अगली कड़ी में।

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