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Posts Tagged ‘क्रिकेट’

सौरव गांगुली ने संन्यास लेने की घोषणा की

October 7th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in चर्चित चेहरे

भारतीय क्रिकेट के एक और बेहतरीन कप्तान और खिलाड़ी को बीसीसीआई के दबाव के आगे झुकना पड़ा।

पिछले साल के “सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर” चुने जाने वाले सौरव गांगुली ने लगातार टीम से बाहर रखे के दबाव के आगे आखिर आज क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर ही दी।

सौरव ने बेंगलुरू की एक पत्रकार वार्ता में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 9 अक्टूबर से आरंभ हो रही टेस्ट श्रृंखला उनके करियर की आखिरी श्रृंखला होगी, इसके बाद वे क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

धोनी के कलेजे को बड़ी ठंडक मिली होगी। सचिन कप्तान बनना नहीं चाहते, कुम्बले और द्रविड को अब टीम से निकालना बोर्ड के लिए जरा भी मुश्किल नहीं होगा।

बधाई धोनी, अब तुम्हारे लिए मैदान खाली है।

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झगड़े ही झगड़े, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में

September 18th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

बांग्लादेश के 13 खिलाड़ी विद्रोह कर आईसीएल में शामिल हो गए, जवाब में उन पर क्रिकेट बोर्ड ने दस साल का प्रतिबंध लगा दिया।

ऑस्ट्रेलिया ने बम विस्फोटों के बाद पाकिस्तान जाने से मना कर दिया, पाकिस्तान नाराज हो गया।

साइमण्ड्स मछली मारने चले गए, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने नाराज होकर उन्हें टीम से निकाल दिया।

सौरव गांगुली खेले भी नहीं, फिर भी बीसीसीआई ने उन्हें ईरानी ट्रॉफी टीम से निकाल दिया।

दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड के अध्य्क्ष ने अंदरूनी झगड़ों से तंग आकर इस्तीफा दे दिया।

ऎसा लगता है जैसे खेल मैदान के अंदर कम और बाहर ज्यादा हो रहा है। तिकड़मों का, खींचतान का और विवादों का अड्डा हो गया है क्रिकेट।

क्या यह क्रिकेट में बढ़ते बेशुमार पैसे का असर है?

एक टूर्नामेंट के आयोजक अपने जैसे किसी दूसरे टूर्नामेंट को पनपने से रोकने के लिए खिलाड़ियों का करियर खत्म किए दे रहे हैं? कि आगे बढने के लिए बोर्ड के पसंदीदा खिलाड़ी ईर्ष्यावश अन्य अच्छे खिलाड़ियों को खुलेआम टीम से निकलवा देते हैं?

लगता है, जैसे क्रिकेट को पैसा खत्म किए दे रहा है….
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“ओटी” तब और अब

September 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अनिल कुम्बले की उम्र अब ढल रही है और धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दी जानी चाहिए।

उम्र का बहाना बना कर विद्रोही खिलाड़ियों से छुटकारा पाना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए नई बात नहीं है।

1983 का विश्व कप: तब भी टीम में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थे जो क्रिकेट बोर्ड की आंखों का कांटा थे और अच्छा खेलने के बावजूद उन्हें येन-केन प्रकारेण टीम से निकालने की कोशिश जारी थी।

ऎसे खिलाड़ियों में पहला नम्बर था मोहिन्दर अमरनाथ का। तब भी क्रिकेट चयनकर्ता यह कहते फिरते थे कि “ओवर 30” खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता ढल जाती है और उन्हे संन्यास ले लेना चाहिए।

’83 के विश्व कप के समय मोहिन्दर 33 वर्ष के थे और उन पर “उम्र ज्यादा हो जाने के कारण” टीम से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा था।
मोहिन्दर ने इस कोशिश का जवाब अपने चमत्कारी प्रदर्शन से दिया और विश्वकप सेमीफाइनल और फाइनल में “मैन ऑफ द मैच” जीत कर चयनकर्ताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

सुनील गावस्कर ने बाद में अपने संस्मरण में लिखा था कि उस विश्वकप के दौरान जब भी कोई वरिष्ठ खिलाड़ी अच्छा कैच लेता या बॉलिंग करता तो बाकी खिलाड़ी “ओटी- ओटी” ( ओवर थर्टी) चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाया करते थे।

संयोगवश, मोहिन्दर अमरनाथ से बोर्ड इसलिए खफा रहता था क्योंकि मोहिन्दर ने एक बार चयनकर्ताओं को “ बंच ऑफ जोकर्स” ( जोकरों क झुंड) कह दिया था। उसकी कीमत मोहिन्दर अब तक चुका रहे हैं।

लेकिन यह बात बोर्ड ने आसानी से भुला दी कि वास्तव में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” सबसे पहले किस खिलाड़ी ने कहा था. क्योंकि उस खिलाड़ी की लोकप्रियता, महान खेल और उसके प्रदेश की क्रिकेट- ताकत के कारण बोर्ड उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

वह खिलाड़ी था सुनील गावस्कर। 1980 के दशक में उन्होंने चयनकर्ताओं पर यह टिप्पणी की थी जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय रही लेकिन बोर्ड ने उसे अनदेखा कर दिया।

लेकिन वही टिप्पणी जब मोहिन्दर अमरनाथ ने की तो उन्हें भारतीय क्रिकेट से सदा के लिए अछूत बना दिया गया।

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