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Posts Tagged ‘Dhoni’

भारत- ऑस्ट्रेलिया एक दिवसीय श्रृंखला

November 1st, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

अब तक भारत 2-1 से श्रृंखला में आगे है। मोहाली में आज चौथा मैच होना है।
ऑस्ट्रेलिया की टीम ब्रेट ली के घायल होने और स्वदेश लौट जाने से निश्चित तौर पर कमजोर पड़ी है। इस मैच के लिए भारत की टीम भी इसी समस्या का सामना कर रही है। सेहवाग और गंभीर घायल हैं और संभवतया इस मैच में नहीं खेलेंगे।
लेकिन धोनी और युवराज अर्से बाद इस समय जबरदस्त “फॉर्म” में हैं। धोनी ने तो चार साल बाद अपना पहला शतक भी मारा; श्रृंखला के दूसरे मैच में।
देखें, चौथे मैच में क्या कमाल होता है।

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धोनी की विदाई की तैयारी?

June 15th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in क्रिकेट

नहीं, बात सिर्फ 20-20 विश्वकप में सेमीफाइनल से भी पहले हार कर प्रतियोगिता से बाहर हो जाने की नहीं है, बात है भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की लगाम कसने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल द्वारा उठाए जा रहे कदमों की।

पहले, सेहवाग विवाद। कारण जो भी हो, इतना तय है कि धोनी और सेहवाग के बीच कुछ खटाई जरूर थी। वर्ना धोनी पूरी टीम के प्रेस कांफ्रेंस में ले जाने और उसके बाद अगली प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के साथ तू-तू मैं-मैं में नहीं उलझते।

लेकिन, बीसीसीआई ने क्या किया? चोट के कारण सेहवाग आगे किसी मैच में खेलेंगे नहीं ये तो बयान दे दिया, लेकिन सेहवाग को न तो टीम से अलग किया, न उन्हें देश वापस बुलाया। सेहवाग पहले की तरह टीम के साथ रहते रहे, यात्रा करते रहे और हर जगह टीम के साथ उसी तरह बने रहे जिस तरह मैच खेलने वाला कोई खिलाड़ी रहता है। यानी धोनी का जी जलता है तो जले, बीसीसीआई ने सेहवाग को उनके सिर पर बिठाए रखा।

धोनी के खिलाफ दूसरा संकेत था युवराज सिंह को उपकप्तान बनाए जाने का। धोनी की एक कमजोरी जगजाहिर है कि वे अपनी कप्तानी के लिए खतरा हो सकने वाले किसी खिलाड़ी को आगे नहीं बढने देते। अगर आपको याद हो, धोनी की कप्तानी के दौरान एक दौर वह भी था जब भारतीय क्रिकेट टीम में कोई उपकप्तान नहीं होता था, सिर्फ कप्तान धोनी होते थे। फिर आर.पी. सिंह को टीम में लिए जाने की जिद में धोनी ने चयनसमिति से पंगा ले लिया और कप्तानी से इस्तीफे की धमकी दे डाली। उस विवाद के बाद ही सेहवाग को चयनसमिति ने उपकप्तान नियुक्त किया था। इशारा था धोनी के लिए, कि तुम्हारे दरवाजे उत्तराधिकारी खड़ा कर दिया गया है।

अब जब सेहवाग चोट के कारण टीम से हटे तो बात उठी उपकप्तानी की। खबरों में कहा गया कि धोनी चाहते थे गंभीर बनें टीम के उपकप्तान, क्योंकि चुप्पे गंभीर से उनकी कप्तानी को कोई खतरा नहीं होता। लेकिन बोर्ड ने उनके सिर पर बिठाया युवराज सिंह को, जो न सिर्फ बड़बोले और गर्म मिजाज हैं बल्कि महत्वाकांक्षी भी हैं और भारतीय टीम की कप्तानी की होड़ में धोनी से पिछड़ने पर काफी दुखी भी हुए थे। न सिर्फ यही, इन दिनों जब धोनी लगातार बल्लेबाजी में असफल हो रहे हैं तब युवराज का बल्ला आग उगल रहा है।

20-20 विश्वकप खेलने इंग्लैण्ड गई टीम में धोनी ने जिस तरह सेहवाग विवाद में सार्वजनिक रूप से अपने जिद्दी बर्ताव का परिचय दिया, उससे लगता है क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सब्र का पैमाना छलक गया है।

अगर टीम जीतती तो शायद बोर्ड चुप रहता, लेकिन टीम के इस तरह हार कर टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद, बोर्ड को मालूम है कि भारत के क्रिकेट दीवाने भी धोनी का पक्ष नहीं लेंगे और धोनी की लगाम कसने के लिए उसके पास अच्छा मौका भी है।

सो धोनी तैयार रहें, भूतपूर्व कप्तानों की श्रेणी में खड़े होने के लिए।

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सचिन दौरा छोड़ कर लौटे

February 9th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

श्रीलंका में खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम का साथ छोड़ कर सचिन तेंदुलकर कल रात देश वापस लौट आए हैं। भारतीय टीम को अभी कल (10 जनवरी) को श्रीलंका के साथ 20-20 मैच खेलना है।

अब सचिन की वापसी को लेकर भले ही टीम प्रबंधन यह दलील दे कि 20-20 मैच में सचिन नहीं खेलने वाले थे इसलिए वे वापस लौट आए, लेकिन सचिन को करीब से जानने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि सचिन कभी भी, किसी भी हालत में दौरे के बीच से टीम को छोड़ कर नहीं लौटते हैं। भले ही वे टीम में रहें या न रहें। आज तक अगर सचिन ने कोई दौरा बीच में छोड़ा है तो वह सिर्फ चोट की वजह से या किसी गंभीर परिस्थिति में- जैसे कि जब उनके पिता का निधन हुआ था।

सचिन को आखिरी दो एकदिवसीय मैचों में “नए खिलाड़ियों को मौका देने” के नाम पर टीम से बाहर रखा गया था। शुरू के तीन मैचों में सचिन खराब अंपायरिंग का निशाना बने थे। कुल मिला कर सचिन के लिए यह श्रृंखला खेलने जाना- न जाना बराबर ही रहा।

फिर धोनी ने कहा, सचिन को वे आराम देना चाहते थे। यह बात तो सभी क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि “ज्यादा क्रिकेट खेलने से थकान” किसको होती है। कम से कम सचिन ने तो आज तक कभी नहीं कहा कि वे क्रिकेट खेलने से कभी थके हों।

लगता तो यही है कि धोनी अब टीम के आखिरी वरिष्ठ खिलाड़ी से छुटकारा पाने की फिराक में हैं और इसके लिए वे किसी भी बहाने की शरण लेने में नहीं चूक रहे।

जब उनके अपने मित्रों को टीम में जबरदस्ती लादने की बात आती है तो धोनी तलवार ले कर खड़े हो जाते हैं। युवराज सिंह फॉर्म में नहीं थे लेकिन उन्हें टीम में हर बार लिया जाता था और पत्रकारों द्वारा इस पर सवाल उठाए जाने पर धोनी ने सार्वजनिक रूप से भन्ना कर कहा था, मैं जब तक चाहूंगा तब तक युवराज हमेशा टीम में रहेंगे। फिर इरफान पठान के बदले फॉर्म से बाहर चल रहे आर पी सिंह को टीम में लेने की जिद में उन्होंने इस्तीफे की धमकी तक दे डाली।

लेकिन सचिन जैसे खिलाड़ी को “आराम” करवाने के नाम पर धोनी टीम से बाहर कर देते हैं।

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सचिन को टीम से बाहर क्यों रख रहे हैं धोनी?

February 8th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

भारतीय क्रिकेट के सफलतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को श्रीलंका में खेलने क्यों नहीं दिया जा रहा है? क्या कप्तान धोनी टीम में बचे इस एकमात्र वरिष्ठ खिलाड़ी की उपस्थिति बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं?

श्रीलंका के साथ पहले तीन एकदिवसीय मैचों में सचिन खराब अंपायरिंग के शिकार हुए और अंपायरों के सरासर पक्षपाती निर्णयों के कारण तीनों पारियों में दस रन के अंदर ही आउट होते गए। उसके बाद चौथे और पांचवे मैचों में उन्हें कप्तान धोनी ने यह कह कर टीम से बाहर कर दिया कि वे नए खिलाड़ियों को मौका देना चाह्ते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि “नए खिलाड़ियों को मौका” देने के नाम पर पुराने बल्लेबाजों में से सिर्फ सचिन को टीम से निकाला गया है, धोनी खुद, उनके मित्र युवराज सिंह, सेहवाग, गंभीर- हर कोई टीम में है।

धोनी खुद को बल्लेबाजी क्रम में प्रोन्नत कर लेते हैं और सुरेश रैना और रोहित शर्मा जैसे बल्लेबाजों को बल्लेबाजे क्र्म में खुद से नीचे कर देते हैं।

धोनी के ईर्ष्यालु और छोटेपन का कोई सबूत बाकी रह गया हो तो सचिन को टीम से बाहर बैठा कर उन्होंने अपने ओछेपन का आसमान छूता सबूत दे दिया है।

धोनी के “नीच” स्वभाव का यह पहलू तब तक छिपा रहेगा जब तक टीम जीत रही है, लेकिन धोनी नाम का यह शख्स भारतीय टीम के लिए उतना ही विनाशकारी बन रहा है जितना कभी ग्रेग चैपल थे।

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धोनी साहब “बिज़ी” हैं

January 12th, 2009 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

खबरों के मुताबिक भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी इतने “बिज़ी” हैं कि घरेलू क्रिकेट खेलना तो दूर, क्षेत्रीय टीम के चयनकर्ताओं से बात तक करने के लिए वे उपलब्ध नहीं हैं।

पूरी खबर यहां पढ़िए
इस खबर के अनुसार, आगामी दिलीप ट्रॉफी के लिए पूर्व क्षेत्र की कप्तानी धोनी की जगह उड़ीसा के शिवसुंदर दास को सिर्फ इसलिए देनी पड़ी क्योंकि घरेलू टीम के चयनकर्ताओं की लाख कोशिश के बावजूद धोनी से उनका संपर्क नहीं हो पाया।

हां भई, अब धोनी रेलवे के टीसी थोड़े ही हैं जो क्षेत्रीय चयनकर्ताओं का फोन आए तो सिर के बल खड़े हो जाएं। अब तो वे राष्ट्रीय टीम के ऎसे कप्तान हैं जिसने “सीनियर खिलाड़ियों” की टीम से छुट्टी कर दी।

जय हो धोनी महाराज की।

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धोनी “म्यूजिक एल्बम” में

September 7th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी अब एक म्यूजिक एल्बम में काम करेंगे।

धोनी ने कहा कि यह “एक नया कैरियर है” और उन्हें उम्मीद है कि उनके फैन उन्हें इस रूप में भी पसंद अकरेंगे।

हमारी तो सलाह है कि धोनी अब “फुल टाइम” फिल्मी कैरियर अपना ही लें। पार्टियों में जाना, बॉलीवुड के लोगों से मिलना- जुलना, विज्ञापनों में काम करना- उनके सारे शौक पूरे हो जाएंगे और “सीनियर्स” को भी छुट्टी मिलेगी खेलने की:)

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“ओटी” तब और अब

September 3rd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अनिल कुम्बले की उम्र अब ढल रही है और धोनी को टेस्ट टीम की कप्तानी दी जानी चाहिए।

उम्र का बहाना बना कर विद्रोही खिलाड़ियों से छुटकारा पाना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए नई बात नहीं है।

1983 का विश्व कप: तब भी टीम में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थे जो क्रिकेट बोर्ड की आंखों का कांटा थे और अच्छा खेलने के बावजूद उन्हें येन-केन प्रकारेण टीम से निकालने की कोशिश जारी थी।

ऎसे खिलाड़ियों में पहला नम्बर था मोहिन्दर अमरनाथ का। तब भी क्रिकेट चयनकर्ता यह कहते फिरते थे कि “ओवर 30” खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता ढल जाती है और उन्हे संन्यास ले लेना चाहिए।

’83 के विश्व कप के समय मोहिन्दर 33 वर्ष के थे और उन पर “उम्र ज्यादा हो जाने के कारण” टीम से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा था।
मोहिन्दर ने इस कोशिश का जवाब अपने चमत्कारी प्रदर्शन से दिया और विश्वकप सेमीफाइनल और फाइनल में “मैन ऑफ द मैच” जीत कर चयनकर्ताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

सुनील गावस्कर ने बाद में अपने संस्मरण में लिखा था कि उस विश्वकप के दौरान जब भी कोई वरिष्ठ खिलाड़ी अच्छा कैच लेता या बॉलिंग करता तो बाकी खिलाड़ी “ओटी- ओटी” ( ओवर थर्टी) चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाया करते थे।

संयोगवश, मोहिन्दर अमरनाथ से बोर्ड इसलिए खफा रहता था क्योंकि मोहिन्दर ने एक बार चयनकर्ताओं को “ बंच ऑफ जोकर्स” ( जोकरों क झुंड) कह दिया था। उसकी कीमत मोहिन्दर अब तक चुका रहे हैं।

लेकिन यह बात बोर्ड ने आसानी से भुला दी कि वास्तव में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” सबसे पहले किस खिलाड़ी ने कहा था. क्योंकि उस खिलाड़ी की लोकप्रियता, महान खेल और उसके प्रदेश की क्रिकेट- ताकत के कारण बोर्ड उससे पंगा लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

वह खिलाड़ी था सुनील गावस्कर। 1980 के दशक में उन्होंने चयनकर्ताओं पर यह टिप्पणी की थी जो मीडिया में काफी चर्चा का विषय रही लेकिन बोर्ड ने उसे अनदेखा कर दिया।

लेकिन वही टिप्पणी जब मोहिन्दर अमरनाथ ने की तो उन्हें भारतीय क्रिकेट से सदा के लिए अछूत बना दिया गया।

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धोनी को टेस्ट कप्तान बनाने की तैयारी?

September 2nd, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in विवाद

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने बयान दिया है कि धोनी अब टेस्ट टीम की कप्तानी के लायक तैयार हो चुके हैं।
यानी सिंहासन खाली करो कि खेल रत्न आते हैं।

वही “खेलरत्न” जो थके होने के कारण श्रीलंका से टेस्ट श्रृंखला छोड़ कर देश लौट आए थे और यहां रिएलिटी टी वी शो, विज्ञापन की शूटिंग और बॉलीवुड के फिल्मी सितारों के साथ अपना बर्थडे मनाने में व्यस्त हो गए थे।

कर्स्टन का कहना है कि, अभी कोई जल्दी नहीं है ( धोनी की ताजपोशी की), कुम्बले अच्छा खेल रहे हैं लेकिन उनकी उम्र अब ढलान पर है।

शायद गैरी को क्रिकेट की दुनिया के बेताज बादशाह, सर डॉन ब्रैडमैन के बारे में ज्यादा पता नहीं है। वर्ना उन्हें यह भी पता होता कि सर डॉन 40 साल की उम्र तक खेल कर रिटायर हुए थे और उनके बारे में कभी किसी ने नहीं कहा कि उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए क्योंकि उनकी “उम्र ढलान पर है।”

क्या यह आश्चर्य की बात नहीं, कि दुनिया की किसी भी क्रिकेट टीम में उम्र की बात उठा कर खिलाड़ियों को रिटायर होने के लिए नहीं कहा जाता लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम में जब देखो तब “उम्र ज्यादा हो गई है, उम्र ज्यादा हो गई है” कह कर विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को टीम निकाला दिया जा रहा है।

क्या यह ऑस्ट्रेलिया में भज्जी- सायमंड्स विवाद ( दूसरा टेस्ट, सिडनी) में कुम्बले ( और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों) के बोर्ड के आगे नहीं झुकने का बदला निकाला जा रहा है? अगर आपको याद हो तो कुम्बले और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों ने तब बोर्ड की आज्ञा का उल्लंघन करते हुए, भज्जी के मामले का निपटारा होने तक कोई भी मैच खेलने से इंकार कर दिया था। यही नहीं, इन वरिष्ठ खिलाड़ियों ने बोर्ड अध्यक्ष शरद पवार के लगातार बयानों के बावजूद तीसरे टेस्ट के लिए पर्थ जाने से भी इंकार कर दिया था।

आप क्या सोचते हैं, क्रिकेट बोर्ड ने आज तक खिलाड़ियों के तेज तेवर बर्दाश्त किए हैं जो अब करेगा? धोनी के रूप में उसे एक मह्त्वाकांक्षीमोहरा मिल गया है जिसे आगे कर क्रिकेट बोर्ड वरिष्ठ खिलाड़ियों को अपनी बात ठुकराने की सजा दे रहा है।

गांगुली, द्रविड और कुम्बले को पहले ही एक दिवसीय टीम से बाहर कर दिया गया था, अब उन्हें वन डे टीम से निकालने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। बस एक सचिन को हाथ नहीं लगा पाता बोर्ड क्योंकि एक तो सचिन को पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियोंके बीच वही सम्मान प्राप्त है जो सर डॉन ब्रैडमैन को प्राप्त है। दूसरे, महाराष्ट्र की क्रिकेट लॉबी इतनी सशक्त है कि सचिन का बाल भी बांका हुआ तो क्रिकेट जगत में विद्रोह हो जाएगा।

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युवराज सिंह टीम में क्यों हैं?

September 1st, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in मैदान से बाहर

युवराज सिंह टीम में क्यों हैं?

यह सवाल श्रीलंका दौरे में उनके प्रदर्शन के बाद लगभग हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के दिमाग में होगा।

उनके प्रदर्शन के आंकड़े देखिए:

कुल पांच एकदिवसीय मैच खेले युवराज ने।

पांच पारियों में कुल 72 रन बनाए।

उनका उच्चतम स्कोर था 23 रन।

उनका बल्लेबाजी औसत रहा 14.40।

सिर्फ यही श्रृंखला ही नहीं, इस पूरे वर्ष ( 2008) में युवराज का प्रदर्शन निम्नस्तरीय रहा है। इस वर्ष अब तक उन्होंने कुल 22 मैचों में 22 पारियां खेली हैं और उनमें 25.8 रनों के औसत से कुल 568 रन बनाए हैं।

मैदान के बाहर उनके बर्ताव का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोलम्बो में खेले गए आखिरी एकदिवसीय मैच से पहले वे अलस्सुबह 2 बजे तक पार्टी मना रहे थे।

कहा जा सकता है कि पार्टीबाजी करना उनका व्यक्तिगत मामला है। बिल्कुल यह उनका व्यक्तिगत मामला है, लेकिन अगर इसका असर उनके खेल पर पड़े तो यह मामला व्यक्तिगत नहीं टीम का हो जाता है।

एंड्र्यू साइमंड्स को ऑस्ट्रेलिया की टीम अगर सुबह मछली पकड़ने जाने पर टीम से निकाल सकती है तो पार्टीबाजी के चक्कर में खराब प्रदर्शन करने वाले युवराज को टीम से क्यों नहीं निकाला जा सकता?

क्या इसलिए कि वे कप्तान धोनी के मित्र हैं?

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भारत- श्रीलंका पांचवा वन डे: भारत मैच हारा

August 29th, 2008 by Administrator | No Comments | Filed in आंखो देखा हाल

भारत- श्रीलंका पांचवा वन डे: कोलम्बो

10.17 बजे

भारत 103 रन पर आउट। श्रीलंका ने 112 रन से मैच जीत लिया।

मेंडिस ने 4 विकेट लिए।

10.12 बजे

9 वां विकेट गया। कुल रन - 95।

100 रन भी नहीं बना पाएगी क्या “खेल रत्न ” धोनी की टीम?

यह स्कोर भारत का श्रीलंका के खिलाफ श्रीलंका में सबसे कम स्कोर होगा। उसका पिछला सबसे कम स्कोर 146 था। ( श्रीलंका के खिलाफ, श्रीलंका में).

10.07 बजे

91 रन, 8 विकेट गए।

मेंडिस ने फिर एक और विकेट लिया, जहीर खान का।

दूसरी पारी इस पिच पर खेलते ही “खेल रत्न” धोनी की टीम को नानी याद आ गई।

अभी तक हर मैच में श्रीलंका ने दूसरी पारी खेली, लेकिन इतनी बुरी हालत उनकी भी नहीं हुई।

विकेट मेडन ओवर रहा मेंडिस का। अब तक उन्होंने तीन विकेट ले लिए हैं।

9.56 बजे

सातवां विकेट गया

मेंडिस ने इरफान पठान को आउट किया। मेंडिस को दूसरा विकेट मिला।

भारत : 90 रन/ 7 विकेट

100 रन बनेंगे या नहीं?

9.44 बजे

85 रन, 6 विकेट गए।

अभी- अभी आउट हुए हैं भारतीय कप्तान धोनी, एक रन बना कर, दिलहारा फर्नांडो की गेंद पर।

भारत का इस श्रृंखला में सबसे बुरा प्रदर्शन।

कुलसेकरा ने इनमें से चार विकेट झटके हैं और आज भारतीय पारी के लिए वे सबसे बड़े खलनायक बन गए ।

जीत के लिए 216 रन बनाने हैं 44 ओवर में। बारिश के कारण मैच के ओवर कम किए गए हैं।

देखें, भारत 100 रन भी बना पाता है या नहीं।

और बारिश आ गई… रैना कोस रहे होंगे, पांच मिनट पहले नहीं आ सकती थी? !!

7.47 बजे

तीसरा विकेट गया!!
छ्क्का मारने के चक्कर में रैना आउट।

भारत का स्कोर: 70 रन/ 3 विकेट

सौ रन तक क्या हाल होगा?

7.23 बजे

भारत का दूसरा विकेट गिरा!!

विराट कोहली आउट!

कुलसेकरा ने भारत को दूसरा झटका दिया।

42 रन पर 2 विकेट: भारत का स्कोर।

7.23 बजे

गंभीर आउट!

भारत का पहला विकेट गिरा। 42 रन पर भारत एक विकेट।

6.58 बजे

कुलसेकरा और तुषारा की जबरदस्त गेंदबाजी! भारतीय बल्लेबज खेल ही नहीं पा रहे उनकी गेंदें।

विराट कोहली और गौतम गंभीर ने 14 गेंदों में सिर्फ 2 रन बनाए हैं।

6.00 बजे
तुषारा, क्या मारा!!

श्रीलंका की ओर से थिलन तुषारा ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए एकदिवसीय मैचों में अपना पहला अर्धशतक मारा है। सिर्फ 43 गेंदों में 6 चौकों की मदद से तुषारा ने यह अर्धशतक पूरा कर लिया।

वे एक ऎसे समय खेलने आए थे जब श्रीलंका की हालत बुरी तरह डगमगाई हुई थी। श्रीलंका ने 6 विकेट कम स्कोर पर खो दिए थे। लेकिन तुषारा और मुबारक की धमाकेदार साझेदारी की बदौलत उन्होंने आज 50 ओवरों में 227 रन बना लिए।

तुषारा और मुबारक ने भारतीय गेंदबाजों की पिटाई करते हुए बेहतरीन खेल का मुजाहिरा किया। 78 गेंदों पर 94 रनों की साझेदारी की दोनों ने।

पारी की समाप्ति पर तुषारा 54 और मुबारक 47 रनों पर नॉट आउट थे।

अब देखें भारतीय बल्लेबाज क्या करते हैं।

2.50 बजे

बल्लेबाजी कर रहे हैं वर्नापुरा और उडावट्टे। आज स्टेडियम में भीड़ ज्यादा नहीं है, ऊपर से बदली भी छाई हुए है। मैच पूरा हो पाएगा या नहीं?

श्रीलंका : 7 रन/ 1 विकेट/ 4.2 ओवर

2.38 बजे

जयसूर्या आउट!!

श्रीलंका ने टॉस जीता है और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। पहले ही ओवर की चौथी गेंद पर जहीर खान ने जयसूर्या का विकेट ले लिया। ओझा ने कैच पकड़ा।

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